Bond Worm | जिले में बीटी कपास पर भी पिंक वर्म और बोंड सडने की बिमारी, कंपनीयों का दावा खोखला साबित हुआ


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यवतमाल. बीटी कपास बिजों से अच्छे दर्जे की और अधिक कपास होने का दावा कंपनीयों द्वारा किया जाता है, लेकिन इस बार खरीफ फसल सत्र में बीटी कंपनीयों के कपास बीजों के कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पडा है. बीटी के कपास पौधों पर गुलाबी ईल्लीयों की मार के साथ ही इसके बोंड सडने से यह बीज बेंचनेवाले कंपनीयों का दावे खोखले साबित होते दिख रहे है.

जिले में हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में बीटी कपास बीजों की बुआई के बाद बडे पैमाने पर बोंड सडने, उत्पादन में कमी आने और बिमारीयों की मार से कपास की फसल चौपट हुए, एैसी शिकायतें किसान कर रहे है.

उल्लेखनिय है की कपास का अच्छा दर्जा होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी अधिक मांग होती है, यवतमाल जिला प्रमुख तौर पर कपास उत्पादक क्षेत्र है.इसी जिले से दुनिया को कपास की खोज का पता लगा था, लंबे समय समय से जिले में पारंपारिक तौर पर कपास की खेती होती है,लेकिन अच्छे दर्जे के लिए जिले के किसान बिते अनेक वर्षों से बीटी कपास बिजों की बुआई करते है.

यह बीज संशोधित करने के लिए बीटी बीज कंपनीयों कों केंद्र और राज्य सरकार द्वारा निधी दी जाती है, लेकिन यह मान्यताप्राप्त बीटी बीज घटीया स्तर के होने से अब किसानों को फसल लेने के बाद नुकसान सहना पड रहा है.

देश में जेनेटीक बीजों के अनुमति के बाद जिले में 2002 से बीजी 1 बीटी बीजों की बुआई शुरु हुई, इसके बाद 2006 में संशोधित बीजी 6 बीजों का आगमन हुआ, इससे जुडी कंपनीयों किसानों को अच्छी फसल होने का दावा करती है.लेकिन इन बीटी उत्पादक कंपनीयों के दावे के बावजुद बीटी बीजों के कपास पर बोंड में किटनाशक छिडकाव सहन करने की क्षमता नही है.यह बात बोंड सडने और इसपर बिमारीयों को देखते हुए सामने आ रही है.

बीजी 3 राऊंड अप अथवा एचटीबीटी बीजों को देश की प्रमुख जेनिटीक इंजिनिअरिंग कमेटी ने मान्यता नही दी है, जिससे जिले में भी बीजी 2 बीज ईस्तेमाल करने के अलावा विकल्प नही है, एैसे में इन बिजों पर भी बोंड गलने और पिंक वर्म, और अन्य बिमारीयों का प्रभाव हो रहा है, एैसे में एग्रिकल्चर युनिर्वसिटी, कृषी विज्ञान संशोधन केंद्रों कों इसमें सुधार के लिए बिते वर्ष केंद्र सरकार ने निधी देकर बीजों की गुणवत्ता सुधार कर किसानों को राहत देने के निर्देश दिए.

लेकिन बीटी बीज कंपनीयों द्वारा बिना संशोधित बीज किसानों को कृषी केंद्रों के जरीए बेंचकर मुनाफा कमा रही है, तो दुसरी ओर सरकार द्वारा संशोधन के लिए करोडों रुपयों की राशी बहाने के बावजुद किसानों को नुकसान झेलना पड रहा है.एैसे में जिले में बीटी बीज कंपनीयों के खोखले दावों और बीज बेंचने से पुर्व सरकार और कृषी विभाग द्वारा खरीफ फसल सत्र के पहले एैसे कंपनीयों के बीजों की उत्पादन क्षमता और दर्जा परखते हुए ईन्हे बेंचने की अनुमती देने की जरुरत किसानों और किसान संगठन जता रहे है.





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