Yavatmal News | वणी के रंगनाथ स्वामी यात्रा के 170 से 180 वर्षो के ऐतिहासीक मंवेशी बाजार की पंरपरा खंडीत, ना जगह की पर्ची ना कोई सूविधा


वणी के रंगनाथ स्वामी यात्रा के 170 से 180 वर्षो के ऐतिहासीक मंवेशी बाजार की पंरपरा खंडीत, ना जगह की पर्ची ना कोई सूविधा

  •  यात्रा मैदान पर स्वतंत्र ऐतिहासिक बैल बाजार, ना जगह की पर्ची ना कोई सूविधा

यवतमाल.  वणी तहसील के रंगनाथ स्वामी यात्रा में ऐतिहासिक बैल बाजार  भरता था लेकिन पिछले दो वर्षो से कोरोना संक्रमण की वजह से यह यात्राा भरी नही है. इस वर्ष भी कोरोना संक्रमण के चलते सरकार ने बैल बाजार को अनुमती नही दी है.जिसके चलते इस वर्ष यात्रा मैदान पर किसानों ने स्वतंत्र ऐतिहासिक बैल बाजार भरा है.

पिछले दो वर्षो से किसानों के बैलों की आदलाबदली नही होने की वजह से इस वर्ष स्वतंत्र ऐसा बैल बाजार भरकर बैलों की खरेदी बिक्री होने लगी.  इस वर्षे कृषि  उत्पन्न बाजार से किसी भी प्रकार की व्यवस्था नही की गई. साथ ही बैलों के व्यवहार के पर्ची व जगह का कर भी नही लिया है. स्वतंत्र  ऐसे बैल बाजार में खुद की व्यवस्था खुद करने की वजह से किसी भी प्रकार की पर्ची नही देने की बात किसानो ने कही.

जिसके चलते यह ऐतिहासिक बैल बाजार खंडीत होने की संभावनाए होने लगी है. क्योंकी बैल बाजार में दिन ब दिन बाजार में जल की किल्लत, सुविधा का अभाव, पिने का जल भी खरेदी करना पड रहा है.ऐसे समेत अनेक समस्याओं का सामना करना पड रहा है. वणी के रंगनाथ स्वामी यात्रा के  170 से 180 वर्ष की  ऐतिहासिक बैल बाजार की धरोहर खंडीत होने के मार्ग पर है.  आज बैल का बाजार में 50 हजार से  से ढाई लाख तक है. लेकिन इस वर्षे कोरोना संक्रमण की वजह से  किसानों ने रंगनाथ स्वामीं यात्रा के अवसर पर स्वतंत्र यात्रा मैदान पर  स्वतंत्र बैल बाजार  भरा हूआ दिखाई दे रहा है.

दुसरे प्रदेश से आते है इस बाजार में बैल 

वणी यह यात्रा व इस यात्रा के बैल बाजार का महत्व कम होने लगा है. इस बाजार में  पहले हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश कर्नाटक समेत महाराष्ट्र गांव देहात से बैल आते थे.  किसान बडे पैमाने पर बैलों की खरेदी करते थे. जिसके चलते इस बाजार में बडी अर्थिक उतार चढाव होता था.  लेकिन यह बाजार संकट में आने की वजह से किसान  परेशान में है.





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