Yavatmal News | शामली में अवैध रेत के टीले पर प्रशासन की कार्रवाई में लीपापोती


शामली में अवैध रेत के टीले पर प्रशासन की कार्रवाई में लीपापोती

  •  बगैर रॉयल्टी रेती का स्टॉक विद्यायल परिसर में पडा 
  • डेढ माह से जारी अवैध रेतसंग्रह की नागरिकों ने की पोलखोल
  • आर्णी तहसीलदार ने की कारवाई, लेकिन रेत के स्टॉक की रॉयल्टी का अता पता नहीं
  • शाला निर्माण करने के नाम पर 495 ब्रास रेत का संग्रह किया

आर्णी. तहसील के सावली में राजनीतिक आश्रय के चलते धडल्ले से रेती की तस्करी की जा रही है. रेत तस्करों को जनप्रतिनिधियों का पूरा सपोर्ट होने की बात सावली में रेत संग्रह का वीडियो वायरल होने के बाद सामने आयी है. अब इस मामले पर प्रशासन क्या कार्रवाई करेगी या नहीं इसे लेकर चर्चाओं का माहौल गरमाया हुआ है. वहीं दूसरी ओर इस मामले को लेकर सीधे आर्णी तहसीलदार के वाटसएप नंबर पर कमेंटस किए जा रहे है.

जिसके बाद इस गंभीर मामले में गंभीरता से ध्यान देकर अधिकारियों को साथ लेकर अवैध रेत जखिरे के ठिकाने पर पहुंचकर पंचनामा किया गया, लेकिन यह रेत संग्रह सदोबा सावली के संस्थाचालक के शाला के प्रांगण में डाला गया. जिससे आखिरकार क्या 489 ब्रास इतने बडे रेत संग्रह का बिल्डींग निर्माण के लिए इस्तेमाल होगा इस बारे में संदेह निर्माण किया जा रहा है. क्योंकि वर्तमान में निर्माणकार्य के लिए रॉयल्टीवाली रेत कम दरों में उपलब्ध हो रही है, ऐसे में इस विद्यालय के मुख्याध्यापक को इतने बडे पैमाने पर रेत जखिरे का संग्रह क्यों करना पडा इस बारे में शंका निर्माण हो चुकी है.

उल्लेखनीय है कि अधिनस्थ कर्मचारियों को साथ लेकर आर्णी के तहसीलदार ने घटनास्थल का पंचनामा करने की कार्रवाई को 12 दिन बीत चुके है, उन्होंने यह 498 ब्रास रेती संग्रह की रॉयल्टी है या नहीं, इसकी जांच करना और जब्ती की कार्रवाई करना जरुरी था, लेकिन इस मामलें में कार्रवाई का दिखावा कर रेततस्करों और राजनीतिक लोगों के सामने तहसीलदार के शरण जाने तथा बंद मुठ्ठी सवा लाख जैसी कार्रवाई की गयी.रेत संग्रह का सिर्फ पंचनामा करते हुए कार्रवाई में देरी की जा रही है.

इस मामले में तहसील प्रशासन द्वारा लीपापोती किए जाने की चर्चा परिसर में जारी है.जल्दी अमीर बनने के लिए रेत के व्यवसाय को ब्लैक डायमंड तस्करी के रुप में प्राथमिकता दी जा रही है, इसमें बदमाशों से लेकर राजनीतिक लोग और प्रशासन के शुक्राचार्यों की भागीदारी है.जिससे प्राकृतिक संपदा का बंटाढार कर सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है.प्रशासन के शुक्राचार्यों की रेततस्करों को मदद मिलने से तस्करों की चांदी हो रही है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, तहसील के अडाण, पैनगंगा, अरुणावती नदी पात्र से अजस्त्र यंत्रों की मदद से अवैध तौर पर तीनों नदी पात्रों से धडल्ले से रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है.यहां से निकले रेत जखीरे को सावली परिसर में रखा गया है,यह रेत जखीरा किस नदी का है इस बारे में प्रशासन को जानकारी होने पर भी पटवारी, मंडल अधिकारी तेरी भी चुप मेरी भी चुप जैसी कहावत के मुताबिक मौन धारण किए हुए है.

बता दें कि इस अवैध रेत तस्करी को उजागर करने के लिए कुछ सामाजिक संगठनों ने सतर्कता बरतकर अधिक जानकारी ली और यह मामला उजागर करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हे भी स्थानिय राजनितीक दबाव का शिकार होना पडा है,इसी के चलते इस मामले को रफादफा किया गया,सावली परिसर में अवैध रेत जखीरा तहसील प्रशासन ने पकडने के बावजुद दबा दिया गया, ऐसी जोरदार चर्चा क्षेत्र में जारी है.

पंचनामा 24 तारीख को फिर कारवाई में देरी क्यों

आर्णी तहसील कार्यालय ने इस मामलें में 24 अप्रैल को ही अवैध तथा बिना रॉयल्टी वाले इस रेत जखीरे के ठिकाने पर जाकर पंचनामा किया था, लेकिन पंचनामा करने के लिए लगनेवाला समय आम नागरिकों में चर्चा का मुद्दा बना है,आर्णी तहसील में बडे पैमाने पर रेतसंग्रह उपलब्ध थे, उनकी जब्ती कर निलामी की गयी, लेकिन इस मामलें में शाला निर्माण के लिए यह रेत जखीरा लेने की जानकारी आर्णी तहसीलदार ने दी, लेकिन इस रेत संग्रह की कोई रॉयल्टी चलान कारवाई के फाईल में उपलब्ध न होने से यह रेतसंग्रह वैध है या अवैध इस बारे में अब संदेह निर्माण हो चुका है.





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