जैव अपशिष्ट: जैव अपशिष्ट की नई दर: अस्पतालों ने जैव अपशिष्ट की नई दर का विरोध किया; आखिर हाई कोर्ट में मसला- बायो वेस्ट की नई दर का मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया है


मुख्य विशेषताएं:

  • शहर के निजी अस्पतालों में बायो-कचरा संग्रह को लेकर विवाद अब मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर बेंच के समक्ष है।
  • विदर्भ हॉस्पिटल एसोसिएशन ने 100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बायो-वेस्ट के संग्रह का विरोध किया।
  • शहर के कुछ अस्पतालों ने बढ़ोतरी का विरोध करने पर कचरा संग्रहण बंद कर दिया।

एम.टी. प्रतिनिधि, नागपुर

शहर के निजी अस्पतालों में जैव अपशिष्ट वसूली का मामला अब मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर बेंच तक पहुंच गया है। विदर्भ अस्पताल एसोसिएशन ने 30 रुपये प्रति किलो के बजाय 100 रुपये प्रति किलो जैव अपशिष्ट एकत्र करने के फैसले के खिलाफ मामला अदालत में ले लिया है। (इसकी समस्या जैव अपशिष्ट की नई दर तक पहुंच गया है उच्च न्यायालय)

2004 में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और एक मेसर्स सुपर्ब हाइजीन डिस्पोजल लिमिटेड के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसी के तहत बायो वेस्ट कलेक्शन की दर 30 रुपये प्रति किलो तय की गई थी। हालांकि, दरों में तदनुसार वृद्धि जारी रही। 2019 में मनपा ने एक नया सर्कुलर भी जारी किया। अब रेट 100 रुपए किलो पहुंच गए हैं। शहर के कुछ अस्पतालों द्वारा इसका विरोध किए जाने पर कचरा संग्रहण रोक दिया गया है। इसका विरोध करते हुए एसोसिएशन ने याचिका दायर की है।

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याचिका के मुताबिक केंद्रीय मंत्रालय ने इस संबंध में कुछ निर्देश दिए हैं। इसमें कई निर्देश हैं कि किस अस्पताल से प्रति माह कितना जैव-कचरा एकत्र किया जाना चाहिए। यह दरों पर कुछ सुझाव भी देता है। एसोसिएशन ने इस संबंध में बार-बार महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संपर्क किया है। हालांकि, एसोसिएशन अदालत में चली गई क्योंकि इससे उसे कोई फायदा नहीं हुआ।

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