harish patel eternals bollywood: हॉलिवुड फिल्म ‘इटर्नल्स’ में काम करने पर बोले हरीश पटेल- मेरा ध्यान तो केवल इंग्लिश पर ही रहता था – actor harish patel talks about his experience in working in hollywood film eternals


‘मिस्टर इंडिया’, ‘मैंने प्यार किया’, ‘अंदाज अपना अपना’, ‘मोहरा’, ‘घातक’ जैसी कई नामचीन हिंदी फिल्में करने वाले सीनियर ऐक्टर हरीश पटेल पिछले कुछ सालों में हॉलिवुड में अपना सिक्का जमा चुके हैं। इस कड़ी में अब वह हिस्सा बने हैं, मार्वल सिनमैटिक यूनिवर्स की सुपरहीरो फिल्म ‘इटर्नल्स‘ का। फिल्म में हरीश ने कुमैल ननजियानी के किरदार किंगो, जो धरती पर एक बॉलिवुड स्टार के रूप में रहता है, के मैनेजर करण की भूमिका निभाई है। ऐसे में, 68 साल की उम्र में ‘इटर्नल्स’ जैसी बड़ी हॉलिवुड फिल्म का हिस्सा बनने को हरीश अपनी खुशनसीबी मानते हैं।

इन सुपरहीरोज के साथ काम करना खुशनसीबी
बकौल हरीश पटेल, ‘मैं फिल्म को लेकर जो रिव्यू सुन रहा हूं। इसकी जितनी तारीफें हो रही हैं, इसे महानतम फिल्मों में गिना जा रहा है। कुछ रिव्यू में मेरे काम के बारे में भी लिखा जा रहा है, वह सब पढ़कर मुझे बहुत खुशी मिल रही है। इतनी बड़ी फिल्म, जिसमें इतने सारे सुपरहीरो हैं, वे कब क्या कर देंगे, वह सुनकर मेरे पैर भी कांप रहे थे, पर उनके साथ काम करने का अनुभव अपने में एक अलग फीलिंग है और मुझे अपने करियर के इस हिस्से में आकर ये रोल मिला, इसे मैं क्या कहूं, मुझे खुद समझ में नहीं आता। मैं तो सिर्फ खुद को भाग्यशाली कह सकता हूं कि मुझे ऐसे लोगों के साथ काम करने का मौका मिला।’

सारा ध्यान लाइनों पर होता था
फिल्म में कुमैल ननजियानी के साथ-साथ एंजलीना जोली, सलमा हायक जैसी नामचीन हॉलिवुड स्टार्स के साथ स्क्रीन शेयर करने और सेट के अनुभव के बाबत हरीश पटेल बताते हैं, ‘वहां सेट पर हर कोई अपने काम में बिजी रहता था। वहां फिल्म से संबंधित बातें ही होती थीं। बाकी बातों के लिए वक्त ही नहीं होता था। उस पर मुझे तो अपनी इंग्लिश को लेकर भी बड़ी टेंशन रहती थी, तो मेरा पूरा ध्यान अपनी लाइन्स, अपने डायलॉग्स और सामने वाले के रिएक्शन पर लगा रहता है। वैसे भी, वहां प्रफेशनलिज्म बहुत है। वहां काम का मतलब सिर्फ काम होता है।’

वहां प्रफेशनलिज्म ज्यादा है
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से हॉलिवुड की तुलना पर हरीश पटेल कहते हैं, ‘वहां प्रफेशनलिजम बहुत है और वह बहुत अच्छी बात है। ऐसा होना भी चाहिए, क्योंकि सबसे अहम चीज आपका काम ही होता है। उसमें किसी तरह का टेंशन नहीं होना चाहिए, जो यहां पर बिलकुल भी नहीं होता है। आप एकदम रिलैक्स होकर काम करते हैं। वहीं, अपने देश में जब हम फिल्में करते हैं, तो हमारे बीच एक भाईचारा भी होता है। मुंबई में आप एक-दूसरे से मिलते-जुलते रहते हैं, तो एक परिवार जैसा बन जाता है। जबकि, यहां शूटिंग हो गई, तो उसके बाद ज्यादा मिलना-जुलना नहीं होता है। ये मैं अपनी बात कर रहा हूं। मैं खुद बिजी हो जाता था। मैं लंदन में था, तो मेरे और भी कई मित्र हैं। यहां आप सिर्फ फिल्म के अंदर ही परिवार के सदस्य होते हैं।’

प्रीमियर में ना जा पाने का अफसोस
हरीश पटेल लंदन जाने के बावजूद कोविड पॉजिटिव हो जाने के चलते फिल्म के प्रीमियर में नहीं शरीक हो पाए। वह कहते हैं, ‘मुझे इस बात का बहुत दुख है कि डिज्नी वालों ने इतनी मेहनत करके मुझे प्रीमियर अटेंड करने को बुलाया, लेकिन यहां आकर मुझे कोविड हो गया, जिसकी वजह से प्रीमियर मैं नहीं जा पाया। इस बात का मुझे बहुत अफसोस है।’

पश्चिम में व्यस्तता के चलते बॉलिवुड से दूरी
अस्सी के दशक से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रहे हरीश पटेल पिछले कुछ सालों से देसी फिल्मों में नहीं दिख रहे हैं। इसकी वजह पूछने पर वह बताते हैं, ‘साल 2004 से मैं यूके में ज्यादा काम कर रहा था। वहां मैंने रॉयल इंटरनैशनल थिएटर के लिए नाटक किया। फिर मैंने टीवी शो कोरोनेशन स्ट्रीट किया और कई टीवी सीरीज किए, तो यहां मुझे काम करने के लिए मुझे समय नहीं मिला। मुझे जो ऑफर मुझे आते थे, तो मैं उन्हें कहता था कि मैं तीन-चार महीने के लिए बाहर जा रहा हूं, तो फिर मुझे फोन ही नहीं आते थे। वे भी क्या करते, मेरे लिए तो रुकने वाले हैं नहीं, तो मैं वहां काम नहीं कर पाया, पर यहां पर मैं काम कर रहा था और उसी का नतीजा है कि आज मैं एमसीयू में काम कर रहा हूं। मुझे इटर्नल्स में काम करने का मौका मिला और मुझे क्या चाहिए।’

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