Nattu Kaka Last Wish Family Career & Death: taarak mehta ka ooltah chashmah nattu kaka aka ghanshyam nayak last wish fans emotional a look at his journey and family- ‘मेरी आखिरी इच्छा मैं मेकअप पहनकर मरूं’, सबको रुला गए ‘नट्टू काका’, एक ऐसा किरदार जो ‘अमर’ रहेगा


पॉप्युलर कॉमिडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) में नट्टू काका (Nattu Kaka) का रोल प्ले करने वाले ऐक्टर घनश्याम नायक (Ghanshayam Nayak) का निधन हो गया है। नट्टू काका यानी घनश्याम नायक पिछले कुछ महीनों से कैंसर (Ghanshyam Nayak cancer) से जूझ रहे थे, जिसका इलाज चल रहा था। बीते साल उनके गले से सर्जरी के दौरान 8 गांठें भी निकाली गई थीं। हालांकि गंभीर रूप से बीमार होने के बावजूद नट्टू काका लगातार काम करते रहे। नट्टू काका के (Nattu Kaka passes away) निधन से फैन्स के बीच शोक की लहर दौड़ गई है और वह सोशल मीडिया पर दुख जाहिर कर रहे हैं।

घनश्याम नायक 13 सालों से ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के साथ जुड़े हुए थे और देखते ही देखते ‘नट्टू काका’ बनकर बच्चों से लेकर बड़ों तक के दिलों में उतर गए। उनके डायलॉग खूब मशहूर थे। अब जब घनश्याम नायक इस दुनिया में नहीं हैं तो फैन्स उन्हें याद कर भावुक हो रहे हैं और उनके पुराने वीडियो व डायलॉग सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं।

कैंसर के बाद नट्टू काका की यह तस्वीर हुई थी वायरल


मेकअप पहनकर ही मरना चाहते थे ‘नट्टू काका’
घनश्याम नायक ऐक्टिंग को लेकर इतने दीवाने थे कि वह आखिरी सांस तक काम करना चाहते थे। उनकी आखिरी इच्छा थी कि वह मेकअप पहनकर ही मरें। इसका जिक्र घनश्याम नायक ने हमारे सहयोगी ईटाइम्स को दिए इंटरव्यू में किया था। घनश्याम नायक ने कहा था, ‘मैं आखिरी सांस तक काम करना चाहता हूं। जब तक जिंदा हूं तब तक इस इंडस्ट्री में काम करना चाहता हूं, ऐक्टिंग करना चाहता हूं। मेरी आखिरी इच्छा है कि मैं मेकअप पहनकर ही मरूं।’

फैन्स भावुक, ‘डॉ. हाथी’ के बाद ‘नट्टू काका’ भी चले गए

बता दें कि ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ का शायद ही ऐसा कोई किरदार है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक के जेहन में न बसा हो। ‘जेठालाल’ से लेकर ‘तप्पू’ ‘नट्टू काका’ और ‘डॉ. हाथी’ के किरदार ने सबके दिलों पर राज किया। जिस तरह डॉ. हाथी का किरदार निभाने वाले ऐक्टर कवि कुमार आजाद की मौत पर लोगों का दिल टूटा था, आज वैसे ही टूटा है। डॉ. हाथी यानी कवि कुमार आजाद की तरह ही नट्टू काका (घनश्याम नायक) भी लोगों के दिलों में रच बस गए थे। ये दो ऐसे किरदार रहे, जिन्होंने सबके दिलोंदिमाग पर एक अमिट छाप छोड़ी है। कवि कुमार आजाद का साल 2018 में निधन हो गया था और अब घनश्याम नायक भी चल बसे।

गंभीर बीमारी में भी करते रहे काम
घनश्याम नायक भले ही बुजुर्ग थे और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, लेकिन काम के प्रति लगन और लोगों को एंटरटेन करने का जज्बा एकदम चौंकाने वाला था। तभी तो इसी साल अप्रैल में जब उनका कैंसर के लिए PET स्कैन किया गया था, तो उससे पहले भी वह दमन और गुजरात से ‘तारक मेहता…’ की शूटिंग से वापस लौटे थे। डॉक्टरों ने जब कह दिया था कि वह काम कर सकते हैं और कोई दिक्कत नहीं है तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा था।

कहा था- पॉजिटिविटी फैलाना चाहता हूं
इस बारे में उन्होंने जून 2021 में हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में कहा था, ‘मेरी महीने में एक बार कीमोथैरपी होती है। इलाज चल रहा है और मैं उम्मीद करता हूं कि जल्दी ठीक हो जाऊंगा। डॉक्टर ने कहा है कि मैं काम करता सकता हूं और उसमें कोई दिक्कत नहीं है। मैं बस पॉजिटिविटी फैलाना चाहता हूं और सबको बताना चाहता हूं कि मैं ठीक हूं।’

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चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर शुरुआत
घनश्याम नायक को भले ही ‘नट्टू काका’ बनकर पॉप्युलैरिटी मिली, लेकिन वह दशकों से फिल्म और टीवी इंडस्ट्री का हिस्सा थे। घनश्याम नायक यानी ‘नट्टू काका’ ने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट 1960 में आई फिल्म ‘मासूम’ से करियर की शुरुआत की थी। तब से लेकर अब तक वह लगातार ऐक्टिंग में सक्रिय रहे। करीब 60 साल के करियर में घनश्याम नायक ने हिंदी फिल्मों और टीवी से लेकर गुजराती फिल्मों तक में काम किया।

350 से भी ज्यादा टीवी शोज, 250 गुजराती, हिंदी फिल्में
घनश्याम नायक ने 350 से भी ज्यादा टीवी सीरियल और करीब 250 हिंदी और गुजराती फिल्मों में काम किया।
बॉलिवुड में वह ‘बरसात’, ‘घातक’, ‘चाइना गेट’, ‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘तेरा जादू चल गया’, ‘लज्जा’, ‘तेरे नाम’, ‘चोरी चोरी’ और ‘खाकी जैसी’ ढेरों फिल्मों में दिखे। इसके अलावा उन्होंने 100 गुजराती नाटकों में भी अपनी ऐक्टिंग का लोहा मनवाया।

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आशा भोसले संग गाना भी गाया
शायद ही लोग जानते होंगे कि नट्टू काका यानी घनश्याम नायक एक प्लेबैक सिंगर भी रहे। विकीपीडिया पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, घनश्याम नायक ने आशा भोसले और महेंद्र कपूर जैसे मशहूर गायकों के साथ 12 गुजराती फिल्मों में अपनी आवाज दी। इसके अलावा उन्होंने 350 गुजराती फिल्मों के लिए डबिंग भी की।

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