Navratri 2021 5th day maa Skandamata puja vidhi shubh muhurat aarti bhog and mantra-Navratri 2021: नवरात्रि के 5वें दिन होगी मां स्कंदमाता की पूजा, इन उपायों को अपनाकर समस्याओं से पाएं निवारण


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Skandamata puja

शारदीय नवरात्र के पंचमी तिथि को मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की जाएगी। दरअसल,अश्विनी शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि आज देर रात 2 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। दोपहर 3 बजकर 4 मिनट तक आयुष्मान योग रहेगा। साथ ही आज दोपहर 2 बजकर 44 मिनट तक अनुराधा नक्षत्र रहेगा। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए मां स्कंदमाता की पूजन विधि और मंत्र।

कैसे पड़ा मां स्कंदमाता नाम?

देवताओं के सेनापति कहे जाने वाले स्कन्द कुमार, यानि कार्तिकेय जी की माता होने के कारण ही देवी मां को स्कंदमाता कहा जाता है। इनके विग्रह में स्कन्द जी बालरूप में माता की गोद में बैठे हैं। माता का रंग पूर्णतः सफेद है और ये कमल के पुष्प परविराजित रहती हैं, जिसके कारण इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। देवी मां की चार भुजाए हैं। ऊपर की दाहिनी भुजा में ये अपने पुत्र स्कन्द को पकड़े हुए हैं और इनके निचले दाहिने हाथ तथा एक बाएं हाथ में कमल का फूल है, जबकि माता का दूसरा बायां हाथ अभय मुद्रा में रहता है। 

माना जाता है कि देवी मां अपने भक्तों पर ठीक उसी प्रकार कृपा बनाये रखती हैं, जिस प्रकार एक मां अपने बच्चों पर बनाकर रखती हैं। देवी मां अपने भक्तों को सुख-शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं। साथ ही स्कंदमाता हमें सिखाती हैं कि हमारा जीवन एक संग्राम है और हम स्वयं अपने सेनापति हैं। 

मां स्कंदमाता मंत्र


आज आपको  के मंत्र का 11 बार जप अवश्य करना चाहिए। मंत्र है- 

सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

नवरात्र के पांचवे दिन माता को भेंट करें ये चीजें ​

नवरात्र में हर दिन ही माता को कुछ न कुछ भेंट करने का विधान है। जैसे नवरात्र के पहले दिन देवी को शरीर में लेपन के तौर पर लगाने के लिए चंदन और केश धोने के लिए त्रिफला चढ़ाना चाहिए। त्रिफला में आंवला, हर्रड़ और बहेड़ा डाला जाता है। दूसरे दिन केषों को ठीक स्थान पर रखने के लिए माता को रेशम की पट्टी दी जाती है। तीसरे दिन पैरों को रंगने के लिए आलता, सिर के लिए सिंदूर और देखने के लिए दर्पण दिया जाता है। चौथे दिन देवी को शहद, मस्तक पर तिलक लगाने के लिए चांदी का एक टुकड़ा और आंख में लगाने का अंजन, यानि कि काजल दिया जाता है। आज नवरात्र के पांचवें दिन देवी मां को अंगराग, यानि सौन्दर्य प्रसाधन की चीज़ें और अपने सामर्थ्य अनुसार आभूषण चढ़ाने का विधान है, लेकिन अगर आपने पिछले दिनों में ये सब माता को न चढ़ाया हो, तो कोई बात नहीं है। आप आज ये सब चीज़ें चढ़ाकर माता का आशीर्वाद पा सकते हैं | लेकिन जो भी चढ़ाना है, वो आज ही चढ़ा लीजिये क्योंकि कल के दिन षष्ठी तिथि में बेल के पेड़ के पास जाकर देवी मां का बोधना करना होता है, जिसकी पूरी विधि हम आपको कल ही बतायेंगे। 

अब जानिए स्कंदमाता के निमित कुछ उपाय करके कैसे अपने जीवन में चल रही समस्याओं का निवारण कर सकते हैं। सबसे पहले जान लेते है- सर्व बांधा निवारण मन्त्र के बारे में, यह मंत्र नोट कर लीजिये, क्योंकि आगे जो उपाय बताया गया है, उसमें इस मंत्र का जप करना जरुरी है। 

मंत्र:

सर्वबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः |

मनुष्यों मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ||

संतान प्राप्ति से लेकर परिवार में किसी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की, जानिए हर समस्या को दूर करने का उपाय:

नवरात्र के दौरान पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी लाकर अपने घर में रखें। मिट्टी पर दूध, दही, घी, अक्षत, रोली चढ़ाए और उसके आगे दिया जलाएं। अगले दिन मिट्टी को वापस पीपल के पेड़ के नीचे डालें दें। ऐसा करने से किसी भी कार्य में आ रही बाधा समाप्त हो जायेगी। मिट्टी की पूजा करने से बाद बाधा निवारण मंत्र की एक माला यानि 108 बार जप करें। 

अगर आपको संतान प्राप्ति नहीं हो रही है, तो आज आप लौंग और कपूर में अनार के दाने मिला कर माँ दुर्गा को आहुति देने से संतान सुख की प्राप्ति होगी। आहुति से पहले सामग्री पर पांच माला बाधा निवारण मन्त्र जरुर पढ़ें।

अगर आपका कारोबार ठीक से नहीं चल रहा है तो आज आप लौंग और कपूर में अमलताश के फूल मिलाये, अगर अमलताश नहीं है तो कोई भी पिला फूल मिलाये। फिर माँ दुर्गा को आहुति दें। आहुति से पहले सामग्री पर बाधा निवारण मंत्र की एक माला जप करें।

अगर आपके परिवार में किसी को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी हो तो 152 लौंग और 42 कपूर के टुकड़े लें इसमे नारियल की गिरी सहद और मिश्री मिला ले और इससे हवन करें। बता दें कि- आहुति से पहले सामग्री पर बाधा निवारण मंत्र की पांच माला जप करें।

अगर आपके परिवार में किसी सदस्य के विवाह में रुकावटें आ रही है तो उसे दूर करने के लिए आज 36 लौंग और 6 कपूर के टुकड़े लें, इसमे हल्दी और चावल मिलाकर माँ दुर्गा को आहुति दें। आहुति देने के पहले लौंग और कपूर पर बाधा निवारण मंत्र का ग्यारह माला जप करें। 

 



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