मस्जिद पर भगवा लहराने का वीडियो राजस्थान के करौली में हुई हिंसा से जुड़ा नहीं है


2 अप्रैल को राजस्थान के करौली में ‘शोभा यात्रा’ के दौरान पथराव की घटना सामने आई. उसी दिन वहां सीआरपीसी की धारा 144 लागू कर दी गई थी. द क्विंट ने रिपोर्ट किया कि सांप्रदायिक झगड़ों के बाद पुलिस ने 46 लोगों को ग़िरफ्तार किया है और सात अन्य लोगों को हिरासत में लिया है. इस घटना में दुकानों और वाहनों को आग के हवाले किया गया और 20 से ज़्यादा लोग घायल हो गए.

इसके बाद एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर काफी शेयर की गई. वीडियो में लोगों को हाथ में भगवा झंडा लेकर एक मस्जिद के सामने नाचते हुए देखा जा सकता है. भीड़ में से एक व्यक्ति को मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा लहराते देखा जा सकता है. वीडियो को करौली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के रूप में शेयर किया गया है. शेयर किये गए दावे में खुशी जताते हुए लिखा गया है, “मीना और गुर्जरों ने उस मस्जिद में बजरंग दल का झंडा फहराया जहां करौली में पथराव किया गया था.”

भाजपा नेता सुजीत कुमार ने वीडियो पोस्ट किए बिना फ़ेसबुक पर यही दावा किया.

कई फ़ेसबुक यूज़र ने भी अलग-अलग भाजपा समर्थक ग्रुप्स पर एक ही दावा किया, जिनमें वी सपोर्ट अर्नब गोस्वामी सर, महाकालेश्वर टेम्पल उज्जैन, मिशन हिंदू राष्ट्र में अपने 100 दोस्तों को जोड़ें , 🚩 सनातनी योद्धा🚩நித்திய போர்வீரன்🚩शाश्वत योद्धा🚩, कंगना रनौत और मोदी योगी शामिल हैं.

पत्रकार राणा अय्यूब ने करौली की एक घटना के रूप में ये वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया. उनके वीडियो को 3.5 लाख से ज़्यादा बार देखा गया.

यूपी की घटना

करौली के ज़िलाधिकारी और मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो करौली का नहीं है. डीएम के ट्विटर हैंडल से पोस्ट किये गए ट्वीट में में कहा गया है कि अफ़वाह फैलाने वालों के खिलाफ़ ‘कड़ी कार्रवाई’ की जाएगी.

एक्टिविस्ट सैय्यद उज्मा परवीन ने ट्वीट किया कि वीडियो उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर का है. बाद में उन्होंने मस्जिद की तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा कि ये मस्जिद गहमर में है.

अभी-अभी मैंने मस्जिद की फोटो मंगवाई है मेरे पास मस्जिद का प्रूफ आया है जिससे यह साबित हो रहा है यह मस्जिद राजस्थान गहलोत…

Posted by Uzma Parveen on Monday, 4 April 2022

वायरल वीडियो में दिख रही मस्जिद की तुलना उज़मा द्वारा शेयर की गई मस्जिद की तस्वीरों से करने पर पता चलता है कि ये वही मस्जिद है.

उज़मा ने जो तस्वीरें पोस्ट की हैं, उनमें से एक में हम मस्जिद की एक दीवार पर खुदा हुआ उर्दू टेक्स्ट देख सकते हैं. पहली पंक्ति में “मकतब-ए-इस्लामिया” लिखा है, दूसरी पंक्ति में “स्कूल” लिखा है और तीसरे वाक्य का पहला शब्द “गहमर” है.

ऑल्ट न्यूज़ ने गाज़ीपुर के पुलिस अधीक्षक राम बदन सिंह से बात की. उन्होंने हमें बताया, “ये घटना गहमर की है. पिछले सप्ताह ही इस मामले को सुलझा लिया गया था. घटना भड़काऊ थी इसे ध्यान में रखते हुए हम इस मुद्दे पर ज़्यादा डिटेल शेयर नहीं करेंगे.”

इसके बाद राम बदन सिंह के PRO ने हमें बताया, “2 अप्रैल को 200-300 लोगों का एक जुलूस मस्जिद की तरफ से गुजर रहा था. कुछ असामाजिक तत्व भड़काऊ व्यवहार कर रहे थे. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया. इससे पहले मस्जिद कमेटी ने कोई शिकायत दर्ज नहीं की थी. समिति ने सोचा कि घटना रिपोर्ट करने या बोलने के लायक नहीं थी. बहरहाल, पुलिस ने संज्ञान लिया है और मामले की जांच की जा रही है.

गौरतलब है कि वीडियो शेयर करने वाले कई लोगों को गाज़ीपुर पुलिस ने जवाब दिया था कि इस मामले में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है.

राम बदन सिंह के PRO ने ये भी कहा कि पुलिस ने उस व्यक्ति की पहचान कर ली है जिसे मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा लहराते हुए देखा गया है. उन्होंने कहा, “उसे ग़िरफ्तार कर लिया गया है” साथ ही ये भी कहा कि मस्जिद एक रिहायशी इलाके में स्थित है.

ऑल्ट न्यूज़ ने गहमर के SHO से भी बात की. उन्होंने कहा, “जांच लंबित है. क्यूंकि फ़ुटेज साफ नहीं है, इसलिए हम कई लोगों की पहचान नहीं कर पाए हैं. जिसे ग़िरफ्तार किया गया है वो नाबालिग है.”

कुल मिलाकर, इस वीडियो को ग़लत तरीके से राजस्थान के करौली में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा का बताकर शेयर किया गया. जबकि, ये घटना यूपी में हुई थी.

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