यात्रा के समय अशुभ- शकुन का कैसे करें निराकरण? | How to know about inauspicious or Superstitions About Travel


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lekhaka-Gajendra sharma

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नई दिल्ली, 09 मई। ज्योतिष शास्त्र में शुभ-अशुभ शकुन का बड़ा महत्व है। यात्रा करने में इनका विशेष ध्यान रखा जाता है। स्पष्ट निर्देश मिलते हैं किकिस दिन यात्रा करनी चाहिए और किस दिन नहीं। लेकिन मनुष्य दिन देखकर यात्राएं तो कर नहीं सकता, कई बार आवश्यक कार्यो के कारण किसी भी दिन यात्रा पर निकलना पड़ सकता है, ऐसे में क्या करें। इसका उपाय भी ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है।

आइए जानते हैं…

यात्राएं और दिशाएं

ज्योतिष शास्त्र की शाखा शकुन शास्त्र के अनुसार सोमवार और शनिवार को पूर्व दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। मंगलवार और बुधवार को उत्तर दिशा में यात्रा करना काल को आमंत्रण देने के समान माना जाता है। रविवार और शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा करने से हानि होती है। इसी प्रकार गुरुवार को दक्षिण दिशा में यात्रा करने से कष्टों की प्राप्ति होती है।

क्या उपाय करें

  • सोमवार एवं शनिवार को पूर्व दिशा में यात्रा करना अनिवार्य हो तो सोमवार दूध पीकर ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करते हुए यात्रा करनी चाहिए। शनिवार को उड़द के दाने पूर्व दिशा में चढ़ाकर तथा कुछ दाने खाकर यात्रा करें। यात्रा के समय ऊं भगभवाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्न: शनि: प्रचोदयात् मंत्र का पाठ यात्रा के समय करते रहें।
  • मंगलवार एवं बुधवार को उत्तर दिशा में यात्रा करना अनिवार्य हो तो मंगलवार को गुड़ का दान करें, कुछ गुड़ खा लें या यात्रा में गुड़ से बने पकवान लेकर जाएं और सेवन करें। यात्रा के पूर्व पांच बार ऊं अंगारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्न: भौम: प्रचोदयात् मंत्र का जाप करें। बुधवार को तिल-गुड़ का दान करके उसी का सेवन करके घर से निकलें। साथ ही बुध गायत्री मंत्र ऊं सौम्यरूपाय विद्महे बाणेशाय धीमहि तन्न: सौम्य: प्रचोदयात् का जाप करें।
  • रविवार एवं शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा करना अनिवार्य हो तो गाय का शुद्ध घी लेकर हवन करें और घी का ही सेवन करें। कन्याओं को दक्षिणा दें। ऊं आदित्याय विद्महे प्रभाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात् मंत्र का जाप करें।
  • गुरुवार को दक्षिण दिशा में यात्रा करना हो तो पांच पके हुए नींबू सूर्योदय से पूर्व स्नान कर गीले कपड़े में लपेटकर फेंक दें। यात्रा से पूर्व दही का सेवन करें तथा शहद, शकर एवं नमक तीनों का समभाग मिलाकर हवन करें। गुरु गायत्री मंत्र ऊं आंगिरसाय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्न: जीव: प्रचोदयात् मंत्र का जाप करें।

English summary

How to know about inauspicious or Superstitions About Travel. read details here.

Story first published: Monday, May 9, 2022, 7:00 [IST]

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