Behind The Recognition Of Taliban Pakistan Plan An Intention To Expand The Terrorist Network – नापाक मंसूबा: तालिबान को मान्यता क्यों चाहता है पाक? विशेषज्ञ बोले- आतंकी नेटवर्क का विस्तार है इरादा


एजेंसी, इस्लामाबाद।
Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 27 Sep 2021 06:17 AM IST

सार

हाल ही में यूरोपीय संसद में अफगानिस्तान में इस्लामाबाद की भूमिका पर चर्चा के दौरान पाकिस्तान की तालिबान को मान्यता दिलाने की कोशिशों पर आश्चर्य जताया गया। यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (ईएफएसएएस) के विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान के मकसद के बारे में अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। असल में वह तालिबान को मानवीय सहायता के आधार पर मान्यता दिलाकर दुनिया की मदद के जरिये आतंकी नेटवर्क का विस्तार करना चाहता है।

तालिबान (सांकेतिक तस्वीर)
– फोटो : पीटीआई

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तालिबान का बर्बर चेहरा सामने आने के बावजूद पाकिस्तान उसे मान्यता के लिए पूरा जोर लगाए हुए है। विशेषज्ञों के मुताबिक, तालिबान के जरिये दुनिया में आंतकी नेटवर्क के विस्तार के लिए ही पाक वहां अपने नियंत्रण वाली सरकार को मान्यता दिलाने की कोशिश में है। पाकिस्तानी परमाणु हथियारों के आतंकी समूह के औजार बनने का खतरा बढ़ रहा है।

हाल ही में यूरोपीय संसद में अफगानिस्तान में इस्लामाबाद की भूमिका पर चर्चा के दौरान पाकिस्तान की तालिबान को मान्यता दिलाने की कोशिशों पर आश्चर्य जताया गया। यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (ईएफएसएएस) के विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान के मकसद के बारे में अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। असल में वह तालिबान को मानवीय सहायता के आधार पर मान्यता दिलाकर दुनिया की मदद के जरिये आतंकी नेटवर्क का विस्तार करना चाहता है।

पाकिस्तानी पीएम इमरान खान तालिबान को मान्यता के लिए दुनिया को मनाने की कोशिश में हैं, वहीं अफगानिस्तान से लोगों के हाथ-पैर काटने और चौराहे पर शवों के लटकाए जाने की खबरें मिल रही हैं। फिर भी पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी संयुक्त राष्ट्र में तालिबान का बचाव करते नजर आते हैं। वहीं, चीन भी तालिबान को अमेरिका के केंद्रीय बैंक में जमा अफगान राष्ट्रीय संपत्ति सौंपे जाने की वकालत कर चुका है। विशेषज्ञाें के मुताबिक, पाक कट्टर विचारधारा से इतनी गहराई से जुड़ा है कि उसके परमाणु हथियार आतंकियों के हाथों में पहुंचने की आशंका चौंकाती नहीं है।

पाक-आतंक के रिश्ते को अनदेखा न करें
दक्षिण एशिया की विशेषज्ञ मरीनो लिखती हैं, पाकिस्तान के परमाणु हथियार पहले से ही आतंकी संगठनों के हाथों में हैं। वे लिखती हैं कि यह समस्या अब इतनी गंभीर हो चुकी है कि इसे पश्चिमी देशों के लिए अनदेखा कर पाना नामुमकिन होगा। मरीनो कहती हैं कि आतंकी देश के हाथों में परमाणु हथियार होना अब तक के किसी भी युद्ध से अधिक बदतर हो सकता है।

आतंक और पाक, एक ही सिक्के के दो पहलू
बोल्टन ने वाशिंगटन पोस्ट में लिखा- पाकिस्तान आगजनी करने वालों और अग्निशामकों की साझा सरकार है। पाकिस्तान और तालिबान एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, बोल्टन ने कहा, पाकिस्तानी सेना के उच्चतम अधिकारी भी कट्टर मानसिकता के हैं, ऐसे में आतंकी संगठन के परमाणु हथियार हाथ लगने के हालात से निपटने के बारे में तैयारी करने का समय है।

विस्तार

तालिबान का बर्बर चेहरा सामने आने के बावजूद पाकिस्तान उसे मान्यता के लिए पूरा जोर लगाए हुए है। विशेषज्ञों के मुताबिक, तालिबान के जरिये दुनिया में आंतकी नेटवर्क के विस्तार के लिए ही पाक वहां अपने नियंत्रण वाली सरकार को मान्यता दिलाने की कोशिश में है। पाकिस्तानी परमाणु हथियारों के आतंकी समूह के औजार बनने का खतरा बढ़ रहा है।

हाल ही में यूरोपीय संसद में अफगानिस्तान में इस्लामाबाद की भूमिका पर चर्चा के दौरान पाकिस्तान की तालिबान को मान्यता दिलाने की कोशिशों पर आश्चर्य जताया गया। यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (ईएफएसएएस) के विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान के मकसद के बारे में अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। असल में वह तालिबान को मानवीय सहायता के आधार पर मान्यता दिलाकर दुनिया की मदद के जरिये आतंकी नेटवर्क का विस्तार करना चाहता है।

पाकिस्तानी पीएम इमरान खान तालिबान को मान्यता के लिए दुनिया को मनाने की कोशिश में हैं, वहीं अफगानिस्तान से लोगों के हाथ-पैर काटने और चौराहे पर शवों के लटकाए जाने की खबरें मिल रही हैं। फिर भी पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी संयुक्त राष्ट्र में तालिबान का बचाव करते नजर आते हैं। वहीं, चीन भी तालिबान को अमेरिका के केंद्रीय बैंक में जमा अफगान राष्ट्रीय संपत्ति सौंपे जाने की वकालत कर चुका है। विशेषज्ञाें के मुताबिक, पाक कट्टर विचारधारा से इतनी गहराई से जुड़ा है कि उसके परमाणु हथियार आतंकियों के हाथों में पहुंचने की आशंका चौंकाती नहीं है।

पाक-आतंक के रिश्ते को अनदेखा न करें

दक्षिण एशिया की विशेषज्ञ मरीनो लिखती हैं, पाकिस्तान के परमाणु हथियार पहले से ही आतंकी संगठनों के हाथों में हैं। वे लिखती हैं कि यह समस्या अब इतनी गंभीर हो चुकी है कि इसे पश्चिमी देशों के लिए अनदेखा कर पाना नामुमकिन होगा। मरीनो कहती हैं कि आतंकी देश के हाथों में परमाणु हथियार होना अब तक के किसी भी युद्ध से अधिक बदतर हो सकता है।

आतंक और पाक, एक ही सिक्के के दो पहलू

बोल्टन ने वाशिंगटन पोस्ट में लिखा- पाकिस्तान आगजनी करने वालों और अग्निशामकों की साझा सरकार है। पाकिस्तान और तालिबान एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, बोल्टन ने कहा, पाकिस्तानी सेना के उच्चतम अधिकारी भी कट्टर मानसिकता के हैं, ऐसे में आतंकी संगठन के परमाणु हथियार हाथ लगने के हालात से निपटने के बारे में तैयारी करने का समय है।

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