India And America Will Start Combined Military Exercises In Alaska From Today – अलास्का: आज से शुरू होगा भारत-अमेरिका के बीच संयुक्त ‘युद्ध अभ्यास’,  29 अक्तूबर तक चलेगा


एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 15 Oct 2021 04:27 AM IST

सार

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह युद्ध अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा सहयोग प्रयास है। इसे दोनों देश बारी-बारी से आयोजित करते है। फरवरी में यह राजस्थान के बीकानेर स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ था।

भारत और अमेरिका के बीच युद्धाभ्यास (सांकेतिक तस्वीर)
– फोटो : पीटीआई

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भारत और अमेरिका के बीच जारी रक्षा सहयोग के तहत दोनों देशों के बीच शुक्रवार से 17वां संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू होगा। 29 अक्तूबर तक चलने वाले ‘युद्ध अभ्यास-2021’ का आयोजन अमेरिका के अलास्का स्थित संयुक्त बेस एल्मेंडोर्फ-रिचर्डसन में होगा, जिसके लिए भारतीय सेना की एक इन्फेंट्री बटालियन के 350 जवान बृहस्पतिवार को रवाना हो गए।
 
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह युद्ध अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा सहयोग प्रयास है। इसे दोनों देश बारी-बारी से आयोजित करते है। फरवरी में यह राजस्थान के बीकानेर स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ था।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, यह अभ्यास दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग की दिशा में एक और कदम है। इसका उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच समझ और आपसी सहयोग बढ़ाना है। इसका 17वां संस्करण ठंडी जलवायु परिस्थितियों में संयुक्त हथियार युद्धाभ्यास पर केंद्रित होगा।

विस्तार

भारत और अमेरिका के बीच जारी रक्षा सहयोग के तहत दोनों देशों के बीच शुक्रवार से 17वां संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू होगा। 29 अक्तूबर तक चलने वाले ‘युद्ध अभ्यास-2021’ का आयोजन अमेरिका के अलास्का स्थित संयुक्त बेस एल्मेंडोर्फ-रिचर्डसन में होगा, जिसके लिए भारतीय सेना की एक इन्फेंट्री बटालियन के 350 जवान बृहस्पतिवार को रवाना हो गए।

 

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह युद्ध अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा सहयोग प्रयास है। इसे दोनों देश बारी-बारी से आयोजित करते है। फरवरी में यह राजस्थान के बीकानेर स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ था।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, यह अभ्यास दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग की दिशा में एक और कदम है। इसका उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच समझ और आपसी सहयोग बढ़ाना है। इसका 17वां संस्करण ठंडी जलवायु परिस्थितियों में संयुक्त हथियार युद्धाभ्यास पर केंद्रित होगा।

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