Initiative For The Resilient Island States: A New Scheme To Help Small Island Countries, Pm Modi Introduced A Plan – इनिशिएटिव फॉर द रेजिलिएंट आइलैंड स्टेट्स: छोटे द्वीप देशों की मदद के लिए नई पहल, पीएम मोदी ने पेश की योजना


पीटीआई, ग्लासगो
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 02 Nov 2021 04:37 PM IST

सार

Initiative for the Resilient Island States : प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ दशकों ने साबित कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन के प्रकोप से कोई भी अछूता नहीं है। चाहे वे विकसित देश हों या प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर देश, यह सभी के लिए एक बड़ा खतरा है। 
 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
– फोटो : ANI

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को छोटे द्वीपीय देशों में आधारभूत ढांचे के विकास के लिए ‘इनिशिएटिव फॉर द रेजिलिएंट आइलैंड स्टेट्स’ (आईआरआईएस) योजना शुरू की। ग्लासगो सम्मेलन के दूसरे दिन इसकी शुरुआत के मौके पर पीएम ने कहा कि यह एक नई उम्मीद, एक नया विश्वास और सबसे कमजोर देशों के लिए कुछ करने का संतोष देता है। 

ग्लासगो जलवायु शिखर सम्मेलन (COP26) में प्रधानमंत्री मोदी के साथ ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन भी शामिल हुए। इस नई योजना की शुरुआत के मौके पर ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरेस भी मौजूद थे। 

जलवायु परिवर्तन बड़ा खतरा
प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ दशकों ने साबित कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन के प्रकोप से कोई भी अछूता नहीं है। चाहे वे विकसित देश हों या प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर देश, यह सभी के लिए एक बड़ा खतरा है। 

छोटे विकासशील द्वीप देशों या एसआईडीएस को जलवायु परिवर्तन के सबसे बड़े खतरे का सामना करना पड़ता है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो अपने उपग्रह के माध्यम से उनके लिए एक विशेष डेटा विंडो बनाएगी ताकि उन्हें चक्रवातों, कोरल-रीफ निगरानी, तटीय निगरानी आदि के बारे में समय पर जानकारी मिल सके। आईआरआईएस में भारत व ब्रिटेन साझेदार हैं। 

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को छोटे द्वीपीय देशों में आधारभूत ढांचे के विकास के लिए ‘इनिशिएटिव फॉर द रेजिलिएंट आइलैंड स्टेट्स’ (आईआरआईएस) योजना शुरू की। ग्लासगो सम्मेलन के दूसरे दिन इसकी शुरुआत के मौके पर पीएम ने कहा कि यह एक नई उम्मीद, एक नया विश्वास और सबसे कमजोर देशों के लिए कुछ करने का संतोष देता है। 

ग्लासगो जलवायु शिखर सम्मेलन (COP26) में प्रधानमंत्री मोदी के साथ ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन भी शामिल हुए। इस नई योजना की शुरुआत के मौके पर ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरेस भी मौजूद थे। 

जलवायु परिवर्तन बड़ा खतरा

प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ दशकों ने साबित कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन के प्रकोप से कोई भी अछूता नहीं है। चाहे वे विकसित देश हों या प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर देश, यह सभी के लिए एक बड़ा खतरा है। 

छोटे विकासशील द्वीप देशों या एसआईडीएस को जलवायु परिवर्तन के सबसे बड़े खतरे का सामना करना पड़ता है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो अपने उपग्रह के माध्यम से उनके लिए एक विशेष डेटा विंडो बनाएगी ताकि उन्हें चक्रवातों, कोरल-रीफ निगरानी, तटीय निगरानी आदि के बारे में समय पर जानकारी मिल सके। आईआरआईएस में भारत व ब्रिटेन साझेदार हैं। 

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