Mohan Bhagwat Slammed Critics Of Veer Savarkar Saying Hindutva Is One And It Will Be Same Always – भागवत बोले: आजादी के बाद चली सावरकर को बदनाम करने की मुहिम, अगला नंबर विवेकानंद का


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Tue, 12 Oct 2021 10:09 PM IST

सार

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में वीर सावरकर के आलोचकों को निशाने पर लिया और कहा कि उन्हें बदनाम करने की मुहिम आजादी के बाद से ही शुरू हो गई थी। वीर सावरकर पर पुस्तक विमोचन के इस कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हुए।

पुस्तक का विमोचन करते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संघ प्रमुख मोहन भगवत
– फोटो : पीटीआई

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार को स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर पर एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान समय में सावरकर के बारे में सही जानकारी की कमी है। सावरकर के बारे में लिखी गईं तीन किताबों से उनको ठीक से जाना जा सकता है।

मोहन भागवत ने कहा कि देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद से ही वीर सावरकर को बदनाम करने की मुहिम शुरू हो गई थी। अब इसके बाद बदनाम करने की यह मुहिम स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती और योगी अरविंद जैसों के खिलाफ भी चलाई जाएगी, क्योंकि वीर सावरकर इन तीनों के ही विचारों से काफी प्रभावित थे।  

संघ प्रमुख ने कहा कि सावरकर का हिंदुत्व, विवेकानंद का हिंदुत्व… ऐसा कहने का फैशन सा हो गया है। हिंदुत्व एक ही है, जो शुरुआत से है और अंत तक वही रहेगा। जो भारत का है वो भारत का ही है और उसकी सुरक्षा और प्रतिष्ठा भारत से ही जुड़ी है। लेकिन, विभाजन के समय पाकिस्तान चले गए मुसलमानों के साथ ऐसा नहीं है।

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार को स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर पर एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान समय में सावरकर के बारे में सही जानकारी की कमी है। सावरकर के बारे में लिखी गईं तीन किताबों से उनको ठीक से जाना जा सकता है।

मोहन भागवत ने कहा कि देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद से ही वीर सावरकर को बदनाम करने की मुहिम शुरू हो गई थी। अब इसके बाद बदनाम करने की यह मुहिम स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती और योगी अरविंद जैसों के खिलाफ भी चलाई जाएगी, क्योंकि वीर सावरकर इन तीनों के ही विचारों से काफी प्रभावित थे।  

संघ प्रमुख ने कहा कि सावरकर का हिंदुत्व, विवेकानंद का हिंदुत्व… ऐसा कहने का फैशन सा हो गया है। हिंदुत्व एक ही है, जो शुरुआत से है और अंत तक वही रहेगा। जो भारत का है वो भारत का ही है और उसकी सुरक्षा और प्रतिष्ठा भारत से ही जुड़ी है। लेकिन, विभाजन के समय पाकिस्तान चले गए मुसलमानों के साथ ऐसा नहीं है।

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