Rajasthan Education Minister Govind Singh Dotasara Said Where There’s Female Staff, Either Principal Or Teachers Take ‘saridon’ – राजस्थान के शिक्षा मंत्री बोले: जिन स्कूलों में महिला स्टॉफ, वहां पुरुष शिक्षकों को खानी पड़ती है ‘सैरीडॉन’


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Wed, 13 Oct 2021 10:20 AM IST

सार

राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता में महिलाएं हैं, लेकिन वे स्कूलों में झगड़ा ही किया करती हैं, जिस कारण पुरुष अध्यापकों को सैरीडॉन टेबलेट खानी पड़ती है। 

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कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के बाद अब राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का बयान सुर्खियों में हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बालिक दिवस पर कहा कि महिलाएं झगड़ालू होती हैं। यही बात उन्हें पुरुषों से आगे निकलने से रोकती है। जिन स्कूलों में महिला स्टॉफ है वहां झगड़े अधिक होते हैं। उन्होंने कहा कि मेरे पास ऐसी बहुत सी रिपोर्ट आती हैं, जहां महिलाएं स्कूलों में झगड़ा करती हैं। अगर इन छोटी-छोटी बातों में सुधार कर लें तो पुरुषों से आगे निकल जाएंगी। 

पुरुषों और प्रधानाचार्यों को खानी पड़ती है ‘सैरीडॉन’
डोटासरा ने चुटकी लेते हुए कहा कि महिलाओं के झगड़े कारण स्कूलों का पुरुष स्टॉफ बहुत परेशान रहता है। पुरुषों और प्रधानाचार्यों को सैरीडॉन टेबलेट तक खानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के लिए योजनाएं लाई है, महिलाएं सरकार की प्राथमिकता में हैं। वे इन सब से ऊपर उठकर पुरुषों से आगे निकलें। 

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री का बयान भी था सुर्खियों में 
इससे पहले कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. के सुधाकर का बयान आया था। इसमें उन्होंने कहा था कि आधुनिक भारतीय महिलाएं बच्चों को जन्म नहीं देना चाहती हैं। वह या तो कुंवारा रहना चाहती हैं या फिर शादी के बाद भी बच्चों को जन्म नहीं देना चाहती हैं उन्हें सेरोगेसी से बच्चे चाहिए। हमारी सोच में यह बदलाव सही नहीं है। यह बयान डॉ. के सुधाकर ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर दिया था। 

विस्तार

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के बाद अब राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का बयान सुर्खियों में हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बालिक दिवस पर कहा कि महिलाएं झगड़ालू होती हैं। यही बात उन्हें पुरुषों से आगे निकलने से रोकती है। जिन स्कूलों में महिला स्टॉफ है वहां झगड़े अधिक होते हैं। उन्होंने कहा कि मेरे पास ऐसी बहुत सी रिपोर्ट आती हैं, जहां महिलाएं स्कूलों में झगड़ा करती हैं। अगर इन छोटी-छोटी बातों में सुधार कर लें तो पुरुषों से आगे निकल जाएंगी। 

पुरुषों और प्रधानाचार्यों को खानी पड़ती है ‘सैरीडॉन’

डोटासरा ने चुटकी लेते हुए कहा कि महिलाओं के झगड़े कारण स्कूलों का पुरुष स्टॉफ बहुत परेशान रहता है। पुरुषों और प्रधानाचार्यों को सैरीडॉन टेबलेट तक खानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के लिए योजनाएं लाई है, महिलाएं सरकार की प्राथमिकता में हैं। वे इन सब से ऊपर उठकर पुरुषों से आगे निकलें। 

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री का बयान भी था सुर्खियों में 

इससे पहले कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. के सुधाकर का बयान आया था। इसमें उन्होंने कहा था कि आधुनिक भारतीय महिलाएं बच्चों को जन्म नहीं देना चाहती हैं। वह या तो कुंवारा रहना चाहती हैं या फिर शादी के बाद भी बच्चों को जन्म नहीं देना चाहती हैं उन्हें सेरोगेसी से बच्चे चाहिए। हमारी सोच में यह बदलाव सही नहीं है। यह बयान डॉ. के सुधाकर ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर दिया था। 



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