T20 World Cup: Did Team India Lose Due To Bcci Policies, Indian Players Did Not Get Relief From Bio-bubble In Last One Year, Got Physically And Mentally Exhausted – T20 Wc से भारत की विदाई: लेग स्पिनर को मौका नहीं, बेबस दिखे बल्लेबाज, क्या Bcci की नीतियों ने हराया?


स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 07 Nov 2021 08:08 PM IST

सार

जिस विंडो का इस्तेमाल आईपीएल के लिए किया गया, उसमें बोर्ड एक या दो सीरीज करवाकर टीम इंडिया की तैयारी करवा सकता था। साथ ही विश्व कप से पहले आराम का थोड़ा मौका भी मिल सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विश्व कप के बीच मिला सात दिनों का गैप भी टीम इंडिया के काम न आया।

टी-20 विश्व कप
– फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

टीम इंडिया के टी-20 विश्व कप से बाहर होने के बाद सवाल उठने लगे हैं। कुछ लोग कप्तान विराट कोहली की कप्तानी पर प्रश्न चिह्न खड़े कर रहे हैं, तो कुछ लोग भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की नीतियों पर भी सवाल उठा रहे हैं। ये सवाल उठना लाजमी भी है, क्योंकि भारतीय खिलाड़ी पिछले एक साल से लगातार बायो-बबल में हैं। उन्हें आराम करने का मौका ही नहीं मिला है। बायो-बबल से खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ा।

इसका असर पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के खिलाफ मैचों में जाहिर भी हो रहा था। टीम के बल्लेबाज दबाव का सामना नहीं कर पाए और जल्दी आउट हो गए। वहीं, गेंदबाज भी पहले दो मुकाबलों में पावरप्ले में विकेट नहीं चटका सके। कप्तान विराट कोहली और उपकप्तान रोहित शर्मा तो खुद पिछले सात महीने से कोई टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेले थे, इसके बावजूद उन्हें टीम में जगह दी गई।

विश्व कप में भारत को छोड़कर लगभग सभी टीमों ने लेग स्पिनर को मौका दिया और उन्होंने अपनी-अपनी टीमों की जीत भी दिलाई। वहीं, टीम इंडिया राहुल चाहर को लेकर तो गई, पर सिर्फ बेंच पर बिठाने के लिए। शानदार फॉर्म में चल रहे युजवेंद्र चहल को स्क्वॉड में ही शामिल नहीं किया गया। 

मैच शुरू होने से पहले ही हारे हुए लग रहे थे खिलाड़ी

गेंदबाजी कोच भरत अरुण ने भी रविवार को कहा कि आईपीएल और विश्व कप के बीच खिलाड़ियों को आराम मिलना चाहिए था। उनकी बात बिलकुल सही साबित हुई। बिजी शेड्यूल होने की वजह से खिलाड़ी टूर्नामेंट शुरू होने से पहले थक गए। यह मैच से पहले उनके बॉडी लैंग्वेज में साफ झलक रहा था। पिछले साल सितंबर से लेकर अब तक भारत ने सिर्फ ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और श्रीलंका के खिलाफ सीरीज खेली है।

अफगानिस्तान और स्कॉटलैंड के खिलाफ मैच को छोड़ दिया जाए, तो पहले दो मुकाबलों में भारतीय बल्लेबाज बेबस दिखे थे। वहीं, कई खिलाड़ियों को आईपीएल की वजह से भारी नुकसान हुआ है। तीन सीरीज के अलावा खिलाड़ी आईपीएल 2020 और आईपीएल 2021 के दो फेज खेल चुके हैं। इससे पहले उन्हें सख्त बायो-बबल का पालन करना पड़ा था। इससे खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ा। इसका जिक्र कप्तान विराट कोहली अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई बार कर चुके हैं।

लेग स्पिनर को मौका क्यों नहीं दिया गया?

आईपीएल शुरू होने से पहले युजवेंद्र चहल फॉर्म में नहीं थे। हालांकि, आईपीएल में उन्होंने अपनी फॉर्म जाहिर की। इसके बावजूद उन्हें स्क्वॉड में शामिल नहीं किया गया। जब पूरी दुनिया अपनी टीम में एक रिस्ट स्पिनर रख रही थी, तो वहीं भारत रवींद्र जडेजा और वरुण चक्रवर्ती को मौका दे रहा था। विश्व कप में वरुण का मिस्ट्री तो कहीं दिखा नहीं, साथ ही खराब स्पिन बॉलिंग ने टीम इंडिया को बाहर का रास्ता दिखाया। 

श्रीलंका के वानिंदु हसारंगा (16 विकेट) और बांग्लादेश के शाकिब अल हसन (11) को छोड़ दें, तो सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बाकी स्पिनर्स लेग स्पिनर ही हैं। ऑस्ट्रेलिया के लेग स्पिनर एडम जाम्पा 11 विकेट, इंग्लैंड के आदिल रशीद 8 विकेट और अफगानिस्तान के राशिद खान आठ विकेट के साथ टॉप पांच स्पिनर्स में शामिल हैं। 

आईपीएल में गंवाया बहुमूल्य समय

पिछले साल सितंबर-अक्तूबर में आईपीएल खेलने के बाद भारतीय खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया पहुंचे थे। वहां, उन्हें कई दिनों तक बायो-बबल में गुजारना पड़ा था। फिर वहां से लौटने पर टीम इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज के लिए बायो-बबल में आई थी। मार्च में सीरीज खत्म होने के बाद खिलाड़ी बबल टू बबल आईपीएल खेलने आ गए थे। इस दौरान कई खिलाड़ी संक्रमित भी हुए। इसके कारण बीसीसीआई को आईपीएल बीच में रोकना पड़ा। इससे भारतीय खिलाड़ी उबरे नहीं थे कि उन्हें विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लिए इंग्लैंड भेज दिया गया।

आईपीएल खेलने के लिए इंग्लैंड से पांच दिनों के अंदर यूएई बुलाया गया

वहां करीब साढ़े तीन महीने टीम इंडिया रही। जून में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के बाद खिलाड़ी इंग्लैंड में रुके, क्योंकि उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट की सीरीज भी खेलनी थी। दौरे पर भी कई खिलाड़ी कोरोना से संक्रमित मिले। इंग्लैंड के खिलाफ 10 सितंबर से होने वाला पांचवां टेस्ट रद्द तो किया गया, लेकिन खिलाड़ियों को तब भी आराम नहीं मिला। बीसीसीआई ने सभी को पांच दिनों के अंदर आईपीएल खेलने के लिए दुबई बुला लिया। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों को एकबार फिर बायो-बबल में एंट्री लेनी पड़ी। 

आईपीएल खत्म होते ही खिलाड़ियों को विश्व कप खेलना था

आईपीएल खत्म नहीं हुआ कि कुछ खिलाड़ी उसके बबल से टीम इंडिया के बबल में आ गए, क्योंकि उन्हें विश्व कप खेलना था। लीग खत्म होने के बाद बाकी खिलाड़ी भी बबल में घुस गए। यानी पिछले एक साल में टीम इंडिया को मानसिक तौर पर राहत नहीं मिली और न ही बीसीसीआई ने इसकी कोशिश की। कप्तान कोहली और बीसीसीआई ने यह तो कहा कि जिस खिलाड़ी को आराम चाहिए, वह ले सकता है, लेकिन टीम में जगह गंवाने के डर से ऐसा किसी ने नहीं किया। वहीं, दूसरी ओर इंग्लैंड के बेन स्टोक्स हैं, जिन्होंने असिमित काल के लिए ब्रेक लिया था। अब जब वह वापसी कर रहे हैं, तो उन्हें फौरन एशेज सीरीज के लिए टीम में वापस बुला लिया गया।

विश्व कप से पहले सिर्फ तीन टी-20 सीरीज खेली टीम इंडिया

आईपीएल को हटा दिया जाए तो इस साल भारतीय टीम ने सिर्फ तीन टी-20 सीरीज खेली है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह टीम इंडिया की तैयारियों के लिए काफी था? क्या आईपीएल में खेलने से ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में होने वाले दबाव को कम किया जा सकता है? इसका जवाब बीसीसीआई को आगे चलकर देना होगा। इन सीरीज में से भी एक में जो कि विश्व कप से ठीक तीन महीने पहले था, उसमें पूरी बेंच स्ट्रेंथ के साथ टीम इंडिया नहीं खेली। बीसीसीआई ने स्प्लिट कैंप्टेंसी का इस्तेमाल किया। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में कप्तान कोहली समेत विश्व कप टीम में शामिल तमाम खिलाड़ी तो खेले, लेकिन श्रीलंका के खिलाफ जुलाई में हुई आखिरी टी-20 सीरीज में बीसीसीआई ने भारत की बी-टीम को भेजा।

सिर्फ वार्म अप मैच से टीम की मजबूती का पता नहीं कर पाए कोहली

ऐसे में खिलाड़ियों को एकजुट होने का मौका नहीं मिला। कोहली और बीसीसीआई को जब टीम की मजबूती और अपने खिलाड़ियों के बारे में ही नहीं पता, तो टीम विश्व कप में अच्छा कैसे कर पाएगी। किस खिलाड़ी को कौन सी जगह खिलाना है, इसका अंदाजा कोहली सिर्फ विश्व कप से पहले वार्म अप मैच से नहीं लगा पाए। तैयारी ठीक नहीं थी, तो बीसीसीआई ने महेंद्र सिंह धोनी को मेंटर के तौर पर इसे मेकअप करने के लिए भेजा। बोर्ड को लगा कि इससे टीम इंडिया विश्व कप में शानदार प्रदर्शन करने लगेगी, लेकिन नतीजा आपके सामने है।

इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान ने अपने खिलाड़ियों को आराम दिया

वहीं, दूसरे बोर्ड को देखें तो इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी), ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान जैसी टीमों ने लीग क्रिकेट के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सीरीज पर भी फोकस किया। उन्होंने खिलाड़ियों को समय-समय पर रोटेट किया और इसका फायदा उन्हें विश्व कप में मिल रहा है। कई विदेशी खिलाड़ी आईपीएल 2021 के पहले फेज में तो आए, लेकिन दूसरा फेज नहीं खेला। इंग्लैंड के कई खिलाड़ी भी पहले फेज में खेले, लेकिन दूसरे फेज में नहीं आए। उन्होंने विश्व कप से पहले खुद को आराम देने का फैसला लिया। इसमें जोस बटलर और जॉनी बेयरस्टो जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। 

जिस रोटेशन पॉलिसी की आलोचना हुई, उससे इंग्लैंड को हुआ फायदा

विश्व क्रिकेट और खुद इंग्लैंड के कई पूर्व खिलाड़ियों ने इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के रोटेशन पॉलिसी की आलोचना की। उन्हें कई सीरीजी में दिग्गज खिलाड़ियों को आराम देने पर सवाल उठाए, लेकिन इसका फायदा उन्हें इस विश्व कप में मिल रहा है। इंग्लैंड सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई होने वाली पहली टीम बनी। यही हाल पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के साथ भी रहा। इन्होंने विश्व कप से पहले अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैचों पर ध्यान दिया। अब इनके खिलाड़ी सही मौके पर क्लिक कर अपनी-अपनी टीम को जिता रहे हैं।

आईपीएल के विंडो में टीम इंडिया की तैयारी करवा सकता था बीसीसीआई

सभी देशों के क्रिकेट बोर्ड यह जानते थे कि इस साल टी-20 विश्व कप होना है। इसके शेड्यूल को ध्यान में रखते हुए सभी बोर्ड ने जून के बाद अंतरराष्ट्रीय टी-20 पर फोकस किया। वहीं, बीसीसीआई इस धुन में था कि कैसे आईपीएल के बचे हुए मैचों को कराया जाए। जिस विंडो का इस्तेमाल आईपीएल के लिए किया गया, उसमें बोर्ड एक या दो सीरीज करवाकर टीम इंडिया की तैयारी करवा सकता था। साथ ही विश्व कप से पहले आराम का थोड़ा मौका भी मिल सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि बीसीसीआई को आईपीएल से होने वाली कमाई का नुकसान होने का डर था।

साल के दूसरे हाफ में बाकी देशों ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर ध्यान दिया

इस विश्व कप में जो टीमें अच्छा खेल रही हैं, उन्होंने अच्छी तैयारियां की थीं। अप्रैल 2021 से अब तक दक्षिण अफ्रीका ने 17, पाकिस्तान ने 16, ऑस्ट्रेलिया ने 12 और इंग्लैंड ने आठ टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले। वहीं, भारतीय टीम ने सिर्फ पांच टी-20 मैच खेले। इस तीन मैचों में भी भारत के सीनियर खिलाड़ी नहीं खेल रहे थे। जब अप्रैल के बाद यानी टी-20 विश्व कप से पहले पिछले सात महीने से विराट-रोहित जैसे सीनियर खिलाड़ियों ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय खेला ही नहीं, तो सवाल यह उठता है कि बीसीसीआई और चयनकर्ताओं ने उन्हें मौका कैसे दिया? 

अगर आईपीएल तैयारी का माध्यम, तो अच्छे खिलाड़ी टीम में क्यों नहीं हैं?

सवाल यह भी उठता है कि जब बीसीसीआई आईपीएल को ही तैयारियों का सही माध्यम मानता है, तो इसमें परफॉर्म करने वाले खिलाड़ियों को भारतीय स्क्वॉड में जगह क्यों नहीं दी गई। ऋतुराज गायकवाड़, हर्षल पटेल, आवेश खान, शिखर धवन, संजू सैमसन, पृथ्वी शॉ, युजवेंद्र चहल, अर्शदीप सिंह और शुभमन गिल जैसे खिलाड़ियों को प्लेइंग स्क्वॉड में शामिल क्यों नहीं किया गया? ये सभी सबसे ज्यादा रन बनाने और विकेट लेने वाले खिलाड़ी थे। टीम इंडिया अगर विश्व कप से बाहर हुई है, तो इसके लिए जिम्मेदार बीसीसीआई, टीम मैनेजमेंट और खिलाड़ी खुद भी हैं।

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