Up Elections 2022: Priyanka Gandhi Vadra Point Out Major Issues In Up, Revealed Her Future Plan – Up Elections 2022: प्रियंका बोलीं- उत्तर प्रदेश मेरे दिल के बेहद करीब, यहां के विकास के लिए काम करती रहूंगी


कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का कहना है कि उत्तर प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याएं हैं। महिलाओं की सुरक्षा और सक्शक्तीकरण, दलितों और कमजोर वर्गों पर अत्याचार, भ्रष्टाचार, खराब कानून व्यवस्था के भी सवाल हैं। कोरोना के दौर में कुप्रबंधन से हुई मौतें भी हैं। ये सब प्रमुख चुनावी मुद्दे हैं। कांग्रेस इन्हें प्रमुखता से उठाते हुए चुनाव को पूरी तरह विकास पर केंद्रित रखने की कोशिश करेगी। मुख्यमंत्री के चेहरे की घोषणा के सवाल पर उनका कहना है कि अभी चुनाव में तीन महीने हैं, इंतजार कीजिए सब पता चल जाएगा। चुनाव के बाद अपनी राष्ट्रीय भूमिका पर उनका कहना है, उत्तर प्रदेश मेरे दिल के बेहद करीब है और मैं यहां के विकास के लिए काम करती रहना चाहूंगी। पेश हैं प्रियंका गांधी वाड्रा से साक्षात्कार के प्रमुख अंश…

उत्तर प्रदेश में आप लगातार जनता के बीच जा रहीं हैं, आपको जनता का मूड कैसा लग रहा है?
जनता दुखी और नाराज है। जहां भी जाती हूं, लोग अपनी निराशा व्यक्त करते हैं। भाजपा ने बातें बहुत कीं, लेकिन डिलीवरी के नाम पर उनके पास सिर्फ झूठा प्रचार है। उत्तर प्रदेश देश का तीसरा सबसे गरीब प्रदेश है। इस सरकार के कार्यकाल में जनता ने बहुत संघर्ष झेला, आर्थिक मंदी और महंगाई की मार सही। कोरोना के चलते लाखों परिवार टूट कर बिखर गए, मगर सरकार की तरफ से सहूलियत नहीं मिली। किसान साल भर आंदोलन करता रहा, उसका लगातार अपमान किया गया। प्रदेश भर में महंगाई, बेरोजगारी बहुत गंभीर समस्याएं हैं, जिन्हें सुलझाने के लिए इस सरकार के पास कोई समाधान नहीं है।

चुनाव में कितनी सफलता मिलेगी, जबकि संगठन लगातार कमजोर हुआ है।
हमने संगठन को मजबूत बनाने के लिए पिछले दो सालों से काफी काम किया है। आज हमारी पार्टी जमीन पर है, गांव-गांव में हमारा कार्यकर्ता सक्रिय है। आपने खुद महसूस किया होगा कि कांग्रेस का कार्यकर्ता ही जनता की आवाज जोरों से उठा रहा है। जबकि अन्य विपक्षी दल जैसे बसपा और सपा, जनता के मूल मुद्दों को उठाने में पूर्णतया असमर्थ रहे हैं। सरकारी एजेंसियों के डर से बसपा पूर्णतया चुप है तो सपा सिर्फ  चुनाव के समय ही थोड़ी सक्रिय हुई है।  मुझे गर्व है कि हमारा संगठन ग्राम स्तर तक जिंदा और ऊर्जावान हुआ है।

आपके मुताबिक प्रदेश में प्रमुख चुनावी मुद्दे क्या हैं?
उत्तर प्रदेश के प्रमुख मुद्दे महंगाई, बेरोजगारी, किसानों का शोषण और महिलाओं की असुरक्षा है। मेरा मानना है कि महिलाओं का राजनीतिक सशक्तीकरण उनके संघर्षमय जीवन का बोझ हल्का करने के लिए बहुत जरूरी है। राजनीति में ज्यादा महिलाओं का होना राजनीतिक माहौल और समाज दोनों को सुधारेगा। यूपी में पिछली सरकारों ने और खासतौर पर भाजपा की सरकार ने राजनीति को धर्म और जाति से इतना ज्यादा जोड़ दिया कि विकास और डिलीवरी पर नेताओं की जवाबदेही खत्म हो चुकी है। मेरा प्रयास है कि उन मुद्दों पर चर्चा की जाए जो जनता की समस्याओं का हल निकालने से जुड़े हैं।

भाजपा, सपा, बसपा के मुकाबले कांग्रेस इस चुनावी लड़ाई में अलग कैसे है?
कांग्रेस के लिए विकास ही मुख्य मुद्दा है। इसलिए पार्टी ने अपने अभियान की शुरुआत उत्तर प्रदेश की प्रगति की प्रतिज्ञाओं से की है। हम किसानों का कर्ज माफ करेंगे, बिजली बिल हाफ  करेंगे और कोरोना काल का बिल माफ करेंगे। हमने गेहूं-धान की एमएसपी ढाई हजार रुपये, गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल देने की प्रतिज्ञा की है। महिलाओं को 40 प्रतिशत टिकट, लड़कियों को स्मार्टफोन और स्कूटी देने की बात कही है। महिलाओं के लिए एक अलग घोषणापत्र तैयार कर रहे हैं। ये सब वो बाते हैं जिनसे उत्तर प्रदेश में एक सकारात्मक राजनीति का रास्ता तैयार होगा।

क्या ये कांग्रेस का महिला कार्ड है?
आप इसे ‘कार्ड’ कह रहे हैं, लेकिन महिलाओं की भागीदारी की बात मेरे दिल के बहुत करीब है। कुछ दिन पहले मैं महोबा में थी तो एक बहन मुझसे मिलने आई। उसके 14 साल के बेटे की निर्मम हत्या कर दी गई थी। आरोपियों के प्रशासन के करीब होने के कारण सही जांच और कार्रवाई तक नहीं हुई। इतने गहरे दुख में भी उस महिला में न्याय के लिए लड़ने का साहस है। उससे दो दिन पहले फाफामऊ (प्रयागराज)में पूरे परिवार की हत्या कर 17 साल की लड़की से सामूहिक दुष्कर्म किया गया। परिवार की महिलाएं घबराई हुई थीं। फिर भी न्याय की आवाज वे उठा रही थीं। उन्नाव हो या हाथरस, जघन्य अपराधों के बावजूद महिलाएं मजबूती से अपनी लड़ाई खुद लड़ रही हैं। लेकिन आज उन्हें हल्के में लिया जा रहा है।

यूपी के चुनावों के बाद आपकी राष्ट्रीय राजनीति में क्या भूमिका होगी?
मेरी इच्छा है कि चुनाव के बाद भी मैं यूपी में काम करती रहूं। चुनाव का जो भी नतीजा हो, यूपी को बेहाली की स्थिति से निकालने का काम करने के लिए प्रतिबद्धता और निरंतरता महत्वपूर्ण है। यूपी मेरे दिल के बहुत करीब है और इसे छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता। इसके साथ-साथ जो भी जिम्मेदारी पार्टी मुझे देना चाहे, उसे मैं निभाने के लिए तैयार रहूंगी।

संविधान दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को एक परिवार की पार्टी कहा है। आप इसका क्या जवाब देंगी?
कितनी बड़ी विडंबना है कि संविधान को तार-तार करने वाली पार्टी और स्वयं प्रधानमंत्री संविधान दिवस पर ऐसी बातें करते हैं। चुनी हुई सरकारों को गिराने में, असांविधानिक तरीके से कानून पारित करके, स्वतंत्र आवाजों को दबाकर, भाजपा ने संविधान के मूल्यों पर बार-बार प्रहार किया है। सच्चाई यह है कि मोदी परिवारवाद के विरोधी नहीं हैं, सिर्फ एक ही परिवार से उन्हें दिक्कत है और वह इसलिए कि मेरा परिवार इनके सामने न कभी झुका है, न कभी झुकेगा। वह कुछ भी कर लें, अपनी एजेंसियों को हमारे पीछे छोड़ दें, हमें बदनाम करवाएं, हम पर तरह-तरह के केस लगवाकर हमारे परिवार के सदस्यों को सताएं, हमें जेल में डलवाएं कुछ भी कर लें, हम पीछे नहीं हटेंगे। रही बात परिवारवाद की, तो मैं भाजपा में तमाम ऐसे नेताओं के नाम गिना सकती हूं जो राजनीतिक परिवारों से आते हैं और उन्हें खूब प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

क्या सपा या बसपा से गठबंधन हो सकता है?
हमने पिछले दो साल में जमीन पर बहुत मेहनत की है। अब संगठन हर जगह है और वह अपनी ताकत दिखा रहा है। प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र वाराणसी में, मुख्यमंत्री के जिले गोरखपुर में और बुंदेलखंड में जैसी रैलियां हुई हैं, वे हमारे संगठन के साथियों की ही मेहनत का नतीजा हैं। जहां तक चुनाव के बाद का सवाल है तो यूपीए का उदाहरण सामने है। जब-जब सांप्रदायिक ताकतों को रोकने की जरूरत पड़ी है, कांग्रेस ने हमेशा सबको साथ लेकर चलने की नीति अपनाई है।

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