Upsc Hindi Medium Students Lagging Behind In Civil Services Examination Difficult Words Cause Trouble – यूपीएससी: सिविल सेवा परीक्षा में लगातार पिछड़ रहे हिंदी माध्यम के छात्र, कठिन शब्दों से होती है दिक्कत


अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 15 Oct 2021 06:00 AM IST

सार

यूपीएससी सिविल सेवा में हिंदी माध्यम के प्रतिभागियों की सफलता दर से जुड़े आंकड़े इस तरफ इशारा कर रहे हैं कि प्रश्न समझ पाना ही मुश्किल होता है। 24 सितंबर को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा-2020 के घोषित परिणाम में 761 प्रतिभागियों को चयनित किया गया। इसमें हिंदी माध्यम वालों की संख्या महज 25-30 के बीच थी।

संघ लोक सेवा आयोग
– फोटो : सोशल मीडिया

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देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा, सवालों का विस्तृत दायरा और नियत समय में बेहतरीन जवाब देने की चुनौती। इनके बीच अगर आप सवालों का ही अर्थ न निकाल सकें तो सालों की आपकी अनवरत पढ़ाई और आईएएस बनने का ख्वाब तार-तार होने की आशंका बढ़ जाती है। हिंदी माध्यम से सिविल सेवा परीक्षा देने वाले प्रतिभागियों के साथ यही हो रहा है। मातृभाषा में पढ़ाई करके इसी भाषा में आईएएस बनने की ललक ही सेवा में दाखिल होने के उनके सपने को दुर्लभ बना देती है।

यूपीएससी सिविल सेवा में हिंदी माध्यम के प्रतिभागियों की सफलता दर से जुड़े आंकड़े इस तरफ इशारा कर रहे हैं। 24 सितंबर को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा-2020 के घोषित परिणाम में 761 प्रतिभागियों को चयनित किया गया। इसमें हिंदी माध्यम वालों की संख्या महज 25-30 के बीच थी। वहीं, हिंदी माध्यम के टॉपर को 200 से भी नीचे की रैंक मिली। कई साल की तुलना में यह काफी खराब है।

दर्द हिंदी के प्रतिभागी का
हिंदी माध्यम से तैयारी करने वाली छात्रा रूबी नियाजुल का कहना है कि प्रश्न समझ पाना ही मुश्किल होता है। प्रारंभिक परीक्षा के साधारण ज्ञान व सीसैट वाले पेपर में कई प्रश्न सिलेबस से बाहर के होते हैं। हिंदी भाषा ऐसी होती है कि बिना अंग्रेजी में प्रश्न पढ़े समझ में ही नहीं आता।

अमूमन सरकारी स्कूलों और कॉलेज की पढ़ाई हिंदी में होती है। जबकि सिविल सेवा में आईआईटी व एमबीए के टॉप संस्थानों के छात्र भी आते हैं। जाहिर तौर पर मुकाबला असमान स्तर पर होता है। इसका असर परिणाम में दिखता है। कोचिंग संस्थान सालों पुराने मैटेरियल का इस्तेमाल करते हैं। 1200-1200 तक का इनका एक बैच होता है। ऐसे में छात्रों की पढ़ाई गुणवत्तापूर्ण नहीं हो पाती। कोचिंग में बताया जाता है कि किताब की जगह संस्थान के नोट्स पढ़ो। इससे जानकारी का स्तर एक दायरे में सिमट जाता है। जबकि यूपीएसएस की परीक्षा का दायरा असीमित होता है।

  • 2014 में हिंदी माध्यम के प्रतिभागियों में सबसे ज्यादा स्कोर करने वाले की रैंक 13 थी।
  • 2015 में यह आंकड़ा 61 था।
  • 2016 में टॉप 50 में हिंदी माध्यम से तीन परीक्षार्थी मेरिट लिस्ट में जगह बनाने में कामयाब हुए।
  • 2017 हिंदी माध्यम से सबसे ज्यादा स्कोर करने वाले की रैंकिंग 146 थी।

विशेषज्ञों की राय
अभिव्यक्ति आईएएस के डायरेक्टर सुनील अभिव्यक्ति का कहना है कि हिंदी के प्रतिभागियों की अनेकों चुनौतियां हैं।

  • हिंदी के दुर्लभ शब्दों के बीच से बाहर निकल पाना प्रतिभागियों के लिए आसान नहीं।
  • हिंदी के प्रतिभागियों का मुकाबला ऐसे अभ्यर्थियों से होता है, जिसने टॉप 20 कॉलेज व यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है।
  • प्रतिभागी सिविल सेवा में चयनित होने के लिए कोचिंग संस्थानों का सहारा लेते हैं, लेकिन इनके भी शिक्षक लीक से नहीं हटते।
  • वह पढ़ाई सिविल सेवा के पाठ्यक्रम के इर्द-गिर्द करवाते हैं। जबकि परीक्षा में सवाल कई बार बाहर से आते हैं।
  • रैंकिंग सुधारने लिए करीब 50 फीसदी प्रतिभागी होते पूर्व चयनित, नए प्रतिभागियों की बढ़ती दिक्कत।
  • कोचिंग खत्म करके घर पर तैयारी करने वाले छात्र नहीं हो पाते अपडेट।
  • कई कोचिंग के 500 से अधिक के एक बैच में हर प्रतिभागी पर शिक्षक का नहीं रहता ध्यान जबकि इस परीक्षा के लिए एक-एक उम्मीदवार को तराशने की आवश्यकता होती है। 
  • यूपीएससी सिविल सेवा 2020 में 761 प्रतिभागी चयनित हुए। सामान्य वर्ग से 263, ईडब्ल्यूएस से 86, ओबीसी से 229, एससी से 122 व एसटी वर्ग से 61 प्रतिभागी शामिल हुए थे।
  • यूपीएससी भाषागत आंकड़े जारी नहीं करता। कोचिंग संस्थान अपनी रणनीति तैयार करने के लिए अपने स्तर यह आंकड़ा जुटाते हैं। अलग-अलग संस्थानों का कहना है कि इस बार 25-30 प्रतिभागी हिंदी माध्यम के चयनित होने में कामयाब रहे।
  • हिंदी माध्यम का टॉपर रैंकिंग में 246 नंबर पर रहा।
  • 2018 की मेरिट लिस्ट में हिंदी माध्यम से सबसे ज्यादा स्कोर करने वाला प्रतिभागी 146 नंबर पर था।
  • 2013 में यूपीएससी ने जब सिलेबस बदला था तो हिंदी माध्यम वाले 25 परीक्षार्थी चयनित हुए थे। इनमें सिर्फ एक ही आईएएस बन सका। सबसे ज्यादा स्कोर पाने वाले की रैंक 107 की थी।

विस्तार

देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा, सवालों का विस्तृत दायरा और नियत समय में बेहतरीन जवाब देने की चुनौती। इनके बीच अगर आप सवालों का ही अर्थ न निकाल सकें तो सालों की आपकी अनवरत पढ़ाई और आईएएस बनने का ख्वाब तार-तार होने की आशंका बढ़ जाती है। हिंदी माध्यम से सिविल सेवा परीक्षा देने वाले प्रतिभागियों के साथ यही हो रहा है। मातृभाषा में पढ़ाई करके इसी भाषा में आईएएस बनने की ललक ही सेवा में दाखिल होने के उनके सपने को दुर्लभ बना देती है।

यूपीएससी सिविल सेवा में हिंदी माध्यम के प्रतिभागियों की सफलता दर से जुड़े आंकड़े इस तरफ इशारा कर रहे हैं। 24 सितंबर को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा-2020 के घोषित परिणाम में 761 प्रतिभागियों को चयनित किया गया। इसमें हिंदी माध्यम वालों की संख्या महज 25-30 के बीच थी। वहीं, हिंदी माध्यम के टॉपर को 200 से भी नीचे की रैंक मिली। कई साल की तुलना में यह काफी खराब है।

दर्द हिंदी के प्रतिभागी का

हिंदी माध्यम से तैयारी करने वाली छात्रा रूबी नियाजुल का कहना है कि प्रश्न समझ पाना ही मुश्किल होता है। प्रारंभिक परीक्षा के साधारण ज्ञान व सीसैट वाले पेपर में कई प्रश्न सिलेबस से बाहर के होते हैं। हिंदी भाषा ऐसी होती है कि बिना अंग्रेजी में प्रश्न पढ़े समझ में ही नहीं आता।


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यूपीएससी में नहीं रहता समान स्तर का मुकाबला

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