Violence Against Hindu In Bangladesh, Ground Report From Noakhali, Dhaka, Chattogram City And Many More – हिंसा के बाद बांग्लादेश से ग्राउंड रिपोर्ट: 37 साल में 13% से 8% हो गई हिंदुओं की आबादी, क्यों लगातार उन पर हो रहे हमले?


सार

दुर्गापूजा के दौरान बांग्लादेश के 22 से ज्यादा जिलों से हिंसा की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं के 150 से ज्यादा दुर्गा पूजा पंडाल और इस्कॉन मंदिर को आग के हवाले कर दिया गया। देवी-देवताओं की मूर्तियां तोड़ दीं। हिंदुओं को मारा-पीटा गया। अमर उजाला के लिए किए गए सॉफ्टवेयर इंजीनियर शौबिक दास ने ग्राउंड रिपोर्ट की है। पढ़िए पूरी खबर…

आंकड़े बांग्लादेश के सरकारी मंत्रालय से लिए गए हैं।
– फोटो : अमर उजाला

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बांग्लादेश से आ रही खबरें बताती हैं कि दुर्गापूजा के दौरान वहां 20 से ज्यादा हिंदुओं की हत्या कर दी गई। अभी भी अलग-अलग जगहों से लाशें मिल रहीं हैं। पढ़िए अखिर क्यों बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हमले नहीं रूक रहे हैं? बांग्लादेश के कट्टरपंथी हिंदुओं से क्या चाहते हैं? कैसे उन पर अत्याचार करते हैं?
 
बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजादी दिलाने में भारत की सबसे अहम भूमिका रही। पाकिस्तान से युद्ध के दौरान भारत ने बांग्लादेश का साथ दिया। कई भारतीय जवान शहीद भी हुए। आजादी के तीन साल बाद यानी 1954 में बांग्लादेश ने जनगणना की थी। तब यहां 7.14 करोड़ की कुल आबादी में 13.50% हिंदू थे। आखिरी जनगणना 2011 में हुई है। इन 37 साल में हिंदुओं की संख्या घटकर महज 8.54% हो गई। 2011 से 2021 तक इसमें करीब पांच फीसदी की और गिरावट आ चुकी है। मतलब ताजा अनुमान लगाएं तो पूरे बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी अब तहज तीन से चार फीसदी रह गई है।
 
बांग्लादेश की 14.47 करोड़ की आबादी में 13 करोड़ से ज्यादा मुसलमान हैं। 1.47 करोड़ में हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और अन्य धर्म के लोग हैं। यहां पिछले कुछ वर्षों में इस्लामिक कट्टरता बढ़ी है। यही कारण है कि यहां हमेशा अल्पसंख्यकों को और खासतौर पर हिंदुओं को ही निशाना बनाया जाता है।

इसकी शुरुआत पाकिस्तान से अलग देश बनने के बाद से ही हो गई थी। 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद यहां अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़की थी। इसमें ज्योतिरमोय गुहा ठाकुरता, गोबिंद चंद्र देब, धीरेंद्र नाथ दत्त जैसे कई बड़े हिंदू नेताओं और आम नागरिकों की की हत्या कर दी गई। इसके बाद 1990, 1995, 1999, 2002 में बड़े दंगे हुए। इन दंगों में हिंदुओं को ही निशाना बनाया गया। इसके बाद से तो ये सिलसिला लगातार जारी रहा। अब सोशल मीडिया के जरिए पहले कोई अफवाह फैलाई जाती है और फिर कट्टरपंथी हिंदुओं पर हमले करने लगते हैं। हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ करना, हिंदुओं के घर जलाना, बच्चों और लड़कियों का अपहरण, दुष्कर्म जैसी वारदात यहां आम हो गईं हैं।
दुर्गा पूजा से पहले ही हिंदूओं पर हमले का दौर शुरू हो गया था। यहां के कुशतिहा, जॉयपुरहट जैसे जिलों में तैयार किए जा रहे दुर्गा मूर्तियों को कट्टरपंथी मुसलमानों ने निशाना बनाया। बताया गया कि कथित तौर पर एक हिंदू ने इस्लाम के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी की है। हालांकि बाद में वो अकाउंट ही फेक निकला। हाल ही में फिर अफवाह उड़ी और इसको लेकर पूरे देश में हिंदुओं पर अटैक शुरू हो गए। दुर्गा पूजा पंडालों, मंदिरों में आगजनी शुरू हो गई। हिंदुओं को मारा-पीटा जाने लगा। कई हिंदुओं के लापता होने की खबर भी है।
कट्टरपंथी मानते हैं कि उनकी पांच वक्त की नमाज के दौरान मंदिरों या घरों में कोई पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन नहीं कर सकता है। नवरात्रि या दुर्गा पूजा के दौरान भी लाउड स्पीकर लगाने से मना किया जाता है। यहां तक की भारत में अगर कुछ होता है तो उसका असर भी बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं पर पड़ता है। सीएए-एनआरसी आंदोलन के दौरान बांग्लादेश में बड़ी संख्या में हिंदुओं के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आईं थी। दिल्ली हिंसा के दौरान भी बांग्लादेश में कई हिंदुओं के घर फूंक दिए गए थे।
हिंदुओं पर लगातार हो रही हिंसा के बाद बांग्लादेश हिंदू यूनिटी काउंसिल ने प्रधानमंत्री शेख हसीना को चिट्ठी लिखी। कहा, ‘माननीय प्रधानमंत्री जी, अगर बांग्लादेशी मुसलमान नहीं चाहते कि हिंदू पूजा-पाठ करें तो हम नहीं करेंगे। लेकिन कृपया हिंदुओं को बचा लें। हम पर लगातार हमले हो रहे हैं। कृपया पूजा मंडपों में आर्मी तैनात करें।’ काउंसिल ने अपने आधिकारिक बयान में ये भी कहा कि पुलिस ने इन हमलों पर तुरंत एक्शन लिया। इसके चलते कई हिंदुओं की जान बच सकी है। हालांकि अभी भी हिंसा जारी है। कुछ पता नहीं चल पा रहा है कि अब तक कितने हिंदुओं को मारा जा चुका है।’
 

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बांग्लादेश से आ रही खबरें बताती हैं कि दुर्गापूजा के दौरान वहां 20 से ज्यादा हिंदुओं की हत्या कर दी गई। अभी भी अलग-अलग जगहों से लाशें मिल रहीं हैं। पढ़िए अखिर क्यों बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हमले नहीं रूक रहे हैं? बांग्लादेश के कट्टरपंथी हिंदुओं से क्या चाहते हैं? कैसे उन पर अत्याचार करते हैं?

 

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