BJP wants to set foot in Azamgarh on the pretext of Vandana Singh, Akhilesh Yadav’s first dent in Lok Sabha seat | वंदना सिंह के बहाने आजमगढ़ में पैर जमाना चाहती है बीजेपी, अखिलेश यादव की लोकसभा सीट में पहली सेंध



डिजिटल डेस्क, लखनऊ। अपनी अपनी पार्टियां छोड़ कर बीजेपी में शामिल हुईं अदिति सिंह और वंदना सिंह का बीजेपी में शामिल होना बीजेपी की दूरदर्शी सोच का एक और उदाहरण सा नजर आता है। तैयारी सिर्फ आने वाले विधानसभा चुनाव की नहीं है। अदिति और वंदना के बहाने बीजेपी यूपी के दो कद्दावर नेताओं की नींव कमजोर करने का पहला कदम उठा चुकी है अदिति सिंह तो रायबरेली से आती हैं। सब जानते हैं रायबरेली सीट सोनिया गांधी की लोकसभा सीट है। वहां अदिति सिंह जैसी तेज तर्रार विधायक का बीजेपी के खेमे में आना जीत का सफर शुरू करने जैसा है। अब बात करते हैं वंदना सिंह की। जो आजमगढ़ लोकसभा सीट के तहत आने वाली सगड़ी विधानसभा सीट से चुनाव जीत चुकी हैं। उनके पति भी इसी सीट से चुनाव जीतते रहे। मतलब साफ है उन्हें ये सीट विरासत में मिली है।

ये है बीजेपी की प्लानिंग?

अब ये समीकरण समझना जरूरी है कि आखिर क्यों बीजेपी को  वंदना सिंह की जरूरत पड़ी। इसके लिए आप पिछले चुनाव  पर नजर डालिए। बीजेपी ने पिछले चुनाव में यूपी से बंपर जीत हासिल की थी। 403 विधानसभा सीटों वाले यूपी में बीजेपी ने जिन 81 सीटों पर हार का मुंह देखा उसमें आजमगढ़ जिल में आने वाली नौ की नौ सीटें शामिल थीं। अब इरादा इस जिले में सेंध मारने का है। जहां अखिलेश यादव जम कर बैठे हैं। और सपा बसपा अपनी साख मजबूत करने की कोशिशों में लगी हुई हैं। वंदना सिंह जैसी विधायक को अपनी पार्टी में शामिल करके बीजेपी ने साफ कर दिया है कि अब आजमगढ़ में अमेठी का इतिहास दोहराने की कोशिश है। 
अखिलेश यादव जो पूरे प्रदेश में जीत का परचम लहराने के लिए हर रोज अलगअलग गठबंधन कर रहे हैं। अब उन्हें अपनी सीट का रूख करना ही होगा। वर्ना ये भी मुमकिन है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में वो उस हार की राह पकड़ ले जिसकी मंजिल शायद अगले लोकसभा चुनाव पर जाकर खत्म होगी। राहुल गांधी से उनकी पारंपरिक सीट छीनने के बाद अब बीजेपी अखिलेश यादव की घेराबंदी में लग चुकी नजर आती है। 

 

 



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