Channi Sarkar made Randhawa’s son-in-law the protector of law | चन्नी सरकार ने रंधावा के दामाद को बनाया कानून का रक्षक



डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। कहते हैं ‘कानून अंधा होता है’। सच में कानून अंधा ही होता है। तभी तो ये युक्ति पंजाब की चन्नी सरकार पर खरी उतर रही है। वैसे भी कांग्रेस में चलन रहा है कि दामादों को कभी आंच नहीं आनी चाहिए। दामाद तो ‘पाहुना’ यानी पूज्यनीय होते हैं और उनसे बढ़कर तो कांग्रेस में कोई पूज्यनीय भी नहीं हैं, चाहे वो राबर्ट बाड्रा ही क्यों न हों। वैसे भी हमारी भारतीय संस्कृति में दामादों की खूब इज्जत होती आई है।

कांग्रेस में दामाद को पद

बता दें कि पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के दामाद का जिन्हें आज राज्य में अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में नियुक्त किया गया है। उन्हें एक अन्य अधिवक्ता के साथ नियुक्ति मिली है। इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी भड़क गई है और उन्होंने इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।  आधिकारिक आदेशानुसार, वकील तरुण वीर सिंह लेहल और मुकेश चंदर बेरी को तत्काल प्रभाव से एडवोकेट जनरल से अतिरिक्त एडवोकेट जनरल के रूप में पंजाब के कार्यालय में नियुक्ति दी गई है। 

राघव चड्ढा ने कांग्रेस को घेरा

तरुण वीर सिंह लेहल पंजाब के गृह मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के दामाद हैं। आप नेता राघव चड्ढा ने इस नियुक्ति को लेकर पंजाब कांग्रेस पर हमला बोलते हुए दावा किया है कि पंजाब में केवल कांग्रेस के मंत्रियों और विधायकों के परिवार वालों को ही नौकरी दी जा रही है। चड्ढा ने ट्वीट किया, कांग्रेस ‘हर घर नौकरी’ के अपने चुनावी वादे को पूर्ण कर रही है लेकिन कुछ संशोधन के साथ। इन नौकरियों को पाने वाले कांग्रेस मंत्रियों और विधायकों के परिवार वाले हैं। नये लाभार्थी उप मुख्यमंत्री रंधावा के दामाद हैं। चन्नी कैप्टन की विरासत को आगे ले जा रहे हैं।

तरूण वीर ने दी सफाई

इस बीच तरुण वीर सिंह लेहल ने कहा है कि उनकी नियुक्ति उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर राज्य के महाधिवक्ता की सिफारिश पर हुई है। उन्होंने कहा, मैं पंजाब उच्च न्यायालय में करीब 13 सालों से प्रेक्टिस कर रहा हूं। किसी का दामाद होने के नाते मुझे कुछ नहीं कहना है। बता दें कि तरुण वीर सिंह लेहल और मुकेश चंदर बेरी पंजाब राज्य और उसकी ओर से पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट में मौजूदा नियमों और शर्तों के मामलों पर बचाव करेंगे। उनकी यह नियुक्ति अनुबंध आधार पर 31 मार्च, 2022 तक की गई, जिसे आदेशानुसार वर्ष  प्रतिवर्ष  बढ़ाया जा सकता है।
 





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