Will the entry of perfume cycle in electoral politics be run in the code of conduct? | समाजवादी पार्टी का इत्र, मायावती के आक्रमक तेवर से गर्माया यूपी का सियासी माहौल



डिजिटल डेस्क,लखनऊ। विवादों से गुजरती हुई उत्तरप्रदेश की चुनावी राजनीति में अब खुशबू की लहर आने की उम्मीद है। एक तरफ हर पार्टी दूसरी पार्टी पर आरोपों के झूठे विवादित बयानों से लोकतंत्र के मंदिर में जो गंदगी फैलाई जाती है उसकी दुर्गंध अब क्या समाजवादी पार्टी अपने इत्र प्रचार से खत्म करने की तैयारी में है। एक तरफ बसपा सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को बीजेपी समेत कई दलों पर जमकर हमला बोला।

बसपा का वार

उन्होंने कहा विधानसभा चुनाव के नज़दीक आते ही पार्टियां जनता को लुभाने का नाटक करती है। बीजेपी सरकार पर बरसते हुए मायावती ने कहा कि बीजेपी सरकार की घोषणाएं, शिलान्यास और अधूरे काम का उद्घाटन किया जा रहा है ये सब विधानसभा चुनाव में होने वाली हार को बताता है योगी  की तरह मेरा ख़ुद का परिवार नहीं है। योगी ने दिखावे के लिए भगवा चोला पहन लिया है जबकि मेरा परिवार अभी  भी वर्ग और धर्म के लोग हैं। मुख्यमंत्री ने एक जाति विशेष के लोगों का ही ख़्याल रखा है। सपा की तरह कांग्रेस ने तरह तरह के झूठे वादे किए हैं, जिसपर जनता भरोसा नहीं करेगी। तेल के बढ़ते दामों को जनता भूलाने वाली नहीं है। मायावती ने कहा  सपा और भाजपा का अंदर-अंदर प्रयास चल रहा है कि चुनाव को हिंदू -मुस्लिम बना दिया जाए। सपा और भाजपा दोनों का चरित्र, जातिवादी और सांप्रदायिक है। इसी लिए साम्प्रदायिक और धार्मिक मुद्दों को उठाकर चुनाव को हिन्दू मुस्लिम बनाने की चाल है। 
आचार संहिता में क्या चल पाएंगी इत्र वाली साइकिल 
चुनाव में धार्मिक और सांप्रदायिक जातिवाद ताकतों के बीच फंसा यूपी चुनाव का प्रचार अब इत्र पर पहुंच गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव साइकिल छपे वाले इत्र के जरिए मतदाताओं के बीच वोट बंटोरने का काम किया जाएगा। देखना ये होगा सपा के अखिलेश  के प्रचार का नया तरीका चुनाव आचार संहिता के बाद बैन होता है या नहीं क्योंकि चुनाव के समय मायावती की मूर्ति वाले पार्क में चुनाव आचार संहिता में ढंक दिया गया था। 



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