फ़र्ज़ी दावा : मुज़फ्फ़रनगर में किसानों को परोसे गये खाने में मुसलमानों ने थूका


एक वीडियो, एक ट्वीट और दो तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही हैं. इनके साथ दावा किया जा रहा है कि मुज़फ्फ़रनगर में हाल ही में हुए किसानों की रैली के दौरान परोसे गए खाने पर मुसलमानों ने थूका था. ऑल्ट न्यूज़ को अपने व्हाट्सऐप नंबर (+91 76000 11160) पर इस दावे की सच्चाई जानने के लिए कई रिक्वेस्ट मिलीं.

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हम हर एक विज़ुअल्स को बारी-बारी से देखेंगे.

फ़ैक्ट चेक

वीडियो

वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि एक आदमी बड़े चम्मच में खाना देख रहा है. वो उसे अपने मुंह के पास ले जा कर उस पर फूंक मार रहा है. ऐसा दावा किया गया है कि वो खाने पर थूक रहा था.

 

मुजफ्फरनगर किसान रैली के लिए बनता हुआ स्पेशल थूक वाला हलवा।
खाये जाओ, खाये जाओ, टिकैत के गुण गाने जाओ।

Posted by Chandra Bhushan Yadav on Monday, 13 September 2021

पिछले साल ये वीडियो इस दावे के साथ शेयर किया गया था कि मुस्लिम समुदाय के सदस्य कोरोना वायरस संक्रमण फैला रहे हैं. उस समय ऑल्ट न्यूज़ ने वीडियो के साथ किये गए ग़लत दावे को ख़ारिज किया था. हमारी वो रिपोर्ट यहां पढ़ी जा सकती है.

हमें ये वीडियो एक यूट्यूब चैनल पर मिला जिसे 2018 में शेयर किया गया था. चैनल अब मौजूद नहीं है, लेकिन इसका आर्काइव लिंक देखा जा सकता है जिससे ये साबित होता है कि क्लिप का किसानों की रैली से कोई लेना-देना नहीं है.

इस वीडियो में असल में क्या हो रहा है, ये जानने के लिए हमने एक इस्लामिक विद्वान से बात की. उन्होंने बताया कि इसे फ़ातिहा पढ़ना कहते हैं. ये खाना पकाने के बाद किया जाता है. पकाए गए खाने पर क़ुरान की कुछ आयतें पढ़ी जाती हैं जिस दौरान भगवान से दुआ मांगी जाती है. कुछ लोग इस दौरान खाने पर फूंकते हैं और कुछ ऐसा नहीं करते हैं. इसी दौरान थोड़े से खाने को निकालकर बरकत मांगी जाती है. उन्होंने ये भी बताया कि प्रार्थना के बाद मस्जिद के बाहर कई बार लोगों को अपने बीमार बच्चों के साथ देखा जा सकता है. प्रार्थना से लौटे लोगों से उन बच्चों पर फूंकने की गुज़ारिश की जाती है क्यूंकि ये मान्यता है कि प्रार्थना में शामिल लोगों को अल्लाह बरकत देता है. ये एक ऐसी प्रथा है जो कि बहुत पुरानी है और अब इसे बहुत ही कम लोग प्रैक्टिस करते हैं.

ये वीडियो बताता है कि कैसे कोई सूरा अल-फ़ातिहा पढ़ सकता है – “आप एक आयत, आयत अल-कुर्सी या सूरा अल फ़ातिहा या कुछ और भी क़ुरान से पढ़ सकते हैं और पानी पी सकते हैं, उससे वजू कर सकते हैं या नहा सकते हैं.”

हालांकि ऑल्ट न्यूज़ इस वीडियो के सोर्स का पता नहीं लगा सका लेकिन इस नतीजे पर ज़रूर पहुंचा है कि इस वीडियो का कोरोना वायरस से जुड़े लॉकडाउन से कोई भी सम्बन्ध नहीं है.

ट्वीट

वायरल दावे के समर्थन में ‘@aadil_ansari’ ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर किया गया है. कथित ट्वीट में लिखा है कि ‘मौलाना आदिल अंसारी’ ने कबूल किया कि मुसलमानों ने राकेश टिकैत, पूनम पंडित और 5 लाख से ज़्यादा गैर-मुस्लिमों को थूक मिला कर खाना परोसा. नीचे हिंदी में पूरा ट्वीट है:

“माशा अल्लाह कल हम मुसलमानों ने मुज़फ्फ़रनगर रैली मे राकेश टिकैत,पुनम पडित समेत करीब 5लाख+कोफिरो को थूक वाला हलवा व अन्य पकवान खिलाकर अल्लाह हू अकबर का नारा कोफिरो के मूह से बुलंद करवा विश्व रिकॉर्ड बना दिया दिया हुकूमत ऐ हिंद से गुजारिश है इसे लिम्का बुक समेत विश्व रिकॉर्ड घोषित किया जाऐ.”

कथित ट्वीट फ़ेसबुक पर काफ़ी वायरल है.

ये साबित करने में कुछ सेकंड लगते हैं कि ट्वीट फ़र्जी है. ऑल्ट न्यूज़ ने इसका टेक्स्ट कॉपी-पेस्ट करने पर पाया कि इसमें कुल 286 कैरेक्टर हैं. एक ट्वीट में ज़्यादा से ज़्यादा 280 कैरेक्टर ही हो सकते हैं.

कुछ यूज़र्स ने एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है जिसमें ‘मुहम्मद दिलशाद (M_Dilshad)’ नामक एक यूज़र का जवाब दिखता है, “हम लखनऊ में एक नया रिकॉर्ड बनायेंगे.”

@aadil_ansari और @M_Dilshad दोनों अकाउंट एक्टिव नहीं लगते. web.archive.org पर ढूंढने पर भी हमें इस हैंडल से किये गए ट्वीट्स नहीं मिले.

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तस्वीरें

खाना परोसने वाले लोगों की दो तस्वीरें वॉट्सऐप फ़ॉरवर्ड से शेयर की गई हैं.

ये तस्वीरें असल में मुज़फ्फ़रनगर में किसानों की रैली की हैं जिसमें कुछ मुस्लिम युवा विरोध कर रहे किसानों को खाना परोसते हुए देखे जा सकते हैं. इसे कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने शेयर किया था.

तस्वीरों का इस्तेमाल मीडिया रिपोर्ट्स में भी किया गया था. (पहली रिपोर्ट, दूसरी रिपोर्ट)

कुल मिलाकर, मुज़फ्फ़रनगर ‘किसान महापंचायत’ के दौरान किसानों को खाना परोसने वाले मुस्लिम युवाओं की तस्वीरों को एक पुराने और फ़र्ज़ी वीडियो के साथ शेयर किया गया जिसमें कुछ मुसलमान कथित रूप से खाने पर फूंक मार रहे थे. इन्हें झूठे दावे के साथ पोस्ट किया गया कि मुसलमानों ने किसानों को थूक मिलाकर खाना परोसा. इस झूठे दावे के समर्थन में एक फ़र्ज़ी ट्वीट भी बनाया गया.


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