Travel Guide: भारत से भूटान जाने का Entry Point है ‘दुआर्स’, प्रकृति से हो जाएगा प्यार


Travel To Dooars: अगर आपको प्रकृति से प्यार है तो भारत (India) में आपके घूमने के लिए कई सारी जगहें मौजूद हैं. इन जगहों पर आप न सिर्फ पर्यावरण (Environment) का मजा ले सकते हैं बल्कि कई तरह के एडवेंचर एक्टिविटीज, कैम्पिंग, बोन फायर और जंगल सफारी भी कर सकते हैं. आप प्रकृति के साथ साथ उस जगह की खूबसूरती को एक्सप्लोर भी कर सकते हैं. अगर आपको नॉर्थ ईस्ट इंडिया अच्छा लगता है तो आप इस बार दुआर्स या डुआर्स (Dooars) जाने का प्लान बना सकते हैं. दुआर्स पश्चिम बंगाल और असम के पास मौजूद है. यह हिमालय की तलहटी में बसा हुआ है जिसके सुहाने सफर का आप भरपूर मजा ले सकते हैं. आइए आपको बताते हैं दुआर्स के बारे में सबकुछ और कैसे आप यहां पहुंच सकते हैं.

प्रकृति की खूबसूरती मौजूद है दुआर्स में
हिमालय की तलहटी में बसा दुआर्स पूर्वोत्तर भारतीय इलाका है. भूटान के आसपास पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ के मैदान ईस्ट हिमालय की तलहटी कहलाते हैं. संकोस नदी इसके 8,800 वर्ग किलोमीटर एरिया को वेस्ट और ईस्ट दुआर्स में बांटती है. ऐसा कहा जाता है कि इस इलाके में अनेक दर्रे हैं जो हिमालय की तरफ जाते हैं. नेपाली, असमिया, मैथिली, भोजपुरी, मगही, और बांग्ला भाषा में दुआर का मतलब दरवाजा होता है. ऐसे में दुआर्स भारत से भूटान के लिए एंट्री डोर के रूप में जाना जाता है. पुराने जमाने में भूटान के लोग मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों के साथ 18 मार्ग द्वार के माध्यम से संपर्क करते थे. पश्चिमी असम स्थित पूर्वी दुआर्स में समतल मैदान हैं, जो कई सारी नदियों द्वारा बंटे हुए हैं और वहां की जनसंख्या बहुत ही कम है. वहीं पश्चिमी दुआर्स पश्चिम बंगाल के उत्तर में है और यह मैदानी इलाके व हिमालय से जुड़े तराई का एक हिस्सा है.

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दुआर्स में करें इन जगहों की सैर
पश्चिम बंगाल से शुरू होकर असम तक फैले हुए दुआर्स में बहुत सारी जगहें ऐसी हैं जहां की सुंदरता देखते ही बनती है. इन जगहों पर आप सोलो ट्रिप भी कर सकते हैं और आप बिल्कुल भी बोर नहीं होंगे. इस पूरे इलाके में भारत और भूटान राज्य के बीच 18 सीमा चौकियां हैं. यहां तक कि दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी, जयगांव और भूटान का फुइनटशौलिंग भी दुआर्स में ही आते हैं. दुआर्स पहुंचकर आप इन सारी जगहों की भी सैर कर सकते हैं. यहां सालभर बहुत बारिश होती है और इसी के चलते यहां हरियाली भी बनी रहती है. इसके अलावा दुआर्स को चाय के बागानों और टिम्बकटू लकड़ी के काम के लिए भी जाना जाता है. यहां के चाय बागान में जाकर आप न केवल घूम सकते हैं बल्कि उनकी पत्तियों को तोड़ते हुए अपना फोटोशूट भी करवा सकते हैं. यहां पर आप मानस नेशनल पार्क, महानंदा वाइल्डलाइफ सेंचुरी, बक्सर टाइगर रिजर्व और चपरामारी वाइल्डलाइफ रिजर्व भी घूम सकते हैं.

नेशनल पार्क में क्या है खास
मानस नेशनल पार्क, महानंदा वाइल्डलाइफ सेंचुरी, बक्सर टाइगर रिजर्व और चपरामारी वाइल्डलाइफ रिजर्व, यूनेस्को की विश्व धरोहर लिस्ट में शामिल हैं. इन नेशनल पार्कों में आप यूनिक कछुए, वाइल्ड वॉटर बफेलो और गोल्डन लंगूर जैसे अनोखे जानवर देख सकते हैं. चपरामारी वाइल्ड लाइफ रिजर्व में बड़ी संख्या में हाथी रहते हैं. वहीं महानंदा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी अपने रॉयल बंगाल टाइगर के लिए जाना जाता है. यहां पर आपको खत्म होने की कगार पर पहुंच चुके फेरी ब्लू और हिमालयन पाइड हौरनबिल जैसे पक्षी भी देखने को मिल सकते हैं.

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कैसे पहुंचें दुआर
यहां तक पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट बागडोगरा और गुवाहाटी है. वहीं अगर आप ट्रेन से सफर कर रहे हैं तो न्यू जलपाइगुड़ी और कुचबिहार नजदीकी रेलवे स्टेशन्स हैं. सड़क मार्ग से यहां पहुंचने के लिए सिलीगुड़ी से आया जा सकता है जो कि कोलकाता, जलपाईगुड़ी और दूसरे शहरों को बसों और टैक्सी की सुविधा से जोड़ता है.

Tags: Lifestyle, Travel

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